| | दरअसल भ्रूण हत्या जैसी घृणित समस्याओं के पीछे समय-समय पर भारत पर हुए विदेशी आक्रमण भी काफी हद तक जिम्मेदार हैं। इतिहास गवाह है कि जिन-जिन इलाकों-जातियों ने विदेशी आक्रमण झेले, वहाँ पर्दा प्रथा, सती जैसी कुप्रथाओं ने जन्म लिया |
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हालाँकि कुछ लोग कहते हैं कि जैसे-जैसे समाज शिक्षित होता जाएगा, भ्रूण हत्या जैसी समस्या अपने आप हाशिए पर आ जाएगी। मैं इससे इत्तेफाक नहीं रखती। मेरी नजर में इस समस्या की जड़ें पढ़े-लिखे तथा संपन्ना लोगों के बीच ज्यादा गहरी हैं। यही वजह है कि देश की क्रीमी लेयर का प्रतिनिधित्व करने वाली दिल्ली में स्त्री-पुヒष लिंगानुपात सबसे खराब स्थिति में है। जहाँ तक संपन्नाता का सवाल है तो देश के सर्वाधिक संपन्ना राज्यों पंजाब तथा हरियाणा में भू्रण हत्या की सबसे ज्यादा घटनाएँ देखने को मिलती हैं, जबकि आदिवासी क्षेत्रों में स्त्री-पुヒषअनुपात इन राज्यों के मुकाबले बेहतर है। दरअसल भ्रूण हत्या जैसी घृणित समस्याओं के पीछे समय-समय पर भारत पर हुए विदेशी आक्रमण भी काफी हद तक जिम्मेदार हैं। इतिहास गवाह है कि जिन-जिन इलाकों-जातियों ने विदेशी आक्रमण झेले, वहाँ पर्दा प्रथा, सती जैसी कुप्रथाओं ने जन्म लिया और इन्हीं में सबसे पहले लिंगानुपात की कमी पाई गई। यही वजह है कि हरियाणा, पंजाब जैसे राज्यों में स्त्री-पुヒष लिंगानुपात में सबसे अधिक असमानता है। इन राज्यों की जनसंख्या में जाट और राजपूत जैसी मार्शल कौमें बड़ी संख्या में हैं। इन कौमों ने विदेशी हमलावरों के हाथों इतनी मार खायी है कि उससे उबरने के लिए उन्होंने अपनी खींज घर की औरतों पर निकाली। वैसे भी जिस भी समाज में मर्द खुद को असहाय महसूस करते हैं, वे अपना सारा गुस्सा औरतों पर निकालते हैं। औरतों को लात-घूँसे मारके उनके अहम की संतुष्टि होती है। जहाँ तक समस्या के समाधान का प्रश्न है, तो वह न तो कोरी भाषणबाजी से हो सकता है, न ही खौफ पैदा करने वाले दंड विधान से। आधुनिक तकनीकों पर रोक लगाना भी इसका समाधान नहीं है। एक तकनीक पर रोक लगाने तक बाजार में नई तकनीक आ चुकी होती है।इस समस्या से निबटने के लिए कानून-व्यवस्था, पुलिस एवं न्यायपालिका में मौजूद खामियों को दूर करना होगा। सबसे बड़ी भक्षक बन चुकी पुलिस तथा राजनीतिज्ञों पर लगाम लगाना होगी। |