मुख्य पृष्ठ > विविध > वेबदुनिया विशेष 08 > मातृ दिवस
सुझाव/प्रतिक्रियामित्र को भेजियेयह पेज प्रिंट करें
 
बेसन की सोंधी रोटी
- निदा फाज़ली
ND

बेसन की सोंधी रोटी पर
खट्‍टी चटनी-जैसी माँ
याद आती है चौका-बासन
चिमटा, फुकनी-जैसी माँ

बान की खुरीं खाट के ऊपर
हर आहट पर कान धरे
आधी सोई आधी जागी
थक‍ी दोपहरी-जैसी माँ

चिडि़यों की चहकार में गूँज़े
राधा-मोहन, अली-अली
मुर्गे की आवाज़ से खुलती
घर की कुण्डी-जैसी माँ

बीवी, बेटी, बहन, पड़ोसन
थोड़ी-थोड़ी-सी सब में
दिन भर इक रस्सी के ऊपर
चलती नटनी -जैसी माँ

बाँट के अपना चेहरा, माथा
आँखें जाने कहाँ गईं
फटे पुराने इक अलबम में
चंचल लड़की-जैसी माँ।
और भी
आप स्मृतियों में बसी रहेंगी
बस एक माँ है जो ख़फ़ा नहीं होती
इस खुशी से वंचित न करो
तुम सर्वस्व हो !
अगले जन्म में भी माँ तू ही मिले
माँ...