मजरूह सुल्तानपुरी चमका बनके अम्न का तारा प्रेम की धरती देश हमारा जय जय हिन्दुस्तान हमारा जय जय हिन्दुस्तान हमारा
अम्न के दुश्मन जंग के बेटे भूल गए हर चाल एटम बम से जा टकराया वीर जवाहर लाल दुनिया ने इक साथ पुकारा जय जय हिन्दुस्तान
जंग के हाथों कितनी चूड़ियाँ हो गईं चकनाचूर मिल जाता बारूद में कितनी मांगों का सिंदूर तुझसे है श्रृंगार हमारा जय जय हिन्दुस्तान
धरती माता झूम रही है भूली दुनिया जंग क्या पीले, क्या गोरे काले मिल गए तीनों रंग झंडा ऊँचा रहे हमारा जय जय हिन्दुस्तान
चमका बन के अम्न का तारा जय जय हिन्दुस्तान हमारा ।
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