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जिसने मुझे जीना सिखाया
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जिसने मुझे जीना सिखाया
गायत्री शर्म
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वो तुम थे,
जिसने मुझे जीना सिखाया।
दु:ख के थपेड़ों से लड़ना,
गिरकर संभलना।
हवाओं से बातें करना
आसमानों में उड़ना
तुमने दी जीवन को नई दिशा,
नई उम्मीदें, नए सपने।
दु:ख के अंधकार में
प्रकाश का किया आगाज
दोस्त तेरा साथ पाकर
हर मुश्किलें हुईं आसान।
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