मुख पृष्ठ > विविध > वेबदुनिया विशेष 08 > मित्रता दिवस > क्या बताऊँ किस तरह जीता है दोस्त
सुझाव/प्रतिक्रियामित्र को भेजियेयह पेज प्रिंट करें
 
क्या बताऊँ किस तरह जीता है दोस्त Search similar articles
ग़ज़ल
अजीज अंसारी
WDWD
हाल अपने घर का कुछ ऎसा है दोस्त
छत है नीची और सर ऊँचा है दोस्त

नफ़रतों की बारिशें चारों तरफ़
प्रेम की बूँदों का वो प्यासा है दोस्त

अब कहाँ पानी मेरी आँखों में है
जो निकलता है लहू होता है दोस्त

दर-बदर तू तो भटकता ही रहा
एक दर के सामने ठहरा है दोस्त

अब तो पानी के भी ऊँचे दाम हैं
रक्त मानव का बहुत सस्ता है दोस्त

रोना आतंकवाद का रोते हैं सब
कोई सच्ची बात कब कहता है दोस्त

मुझको अपने ग़म से ही फ़ुरसत नहीं
क्या बताऊँ किस तरह जीता है दोस्त

दिन में जो हँस-हँस के मिलता है 'अज़ीज़'
रात में उठ-उठ के वो रोता है दोस्त।
और भी
सितारों की भी भूमिका होती है दोस्ती में