भारत की अखंडता के महत्व को बताते हुए वीर सावरकरजी ने अपने उद्बोधन में कहा कि यदि मुसलमान पाकिस्तान के लिए कृतनिश्चय हो तो हिन्दू को कमर कसना होगी। उन्हें संगठित होना होगा। यदि देश खंडित होता है तो स्वतंत्रता किस काम की? देश की अखंडता के लिए संघर्ष करना हमारा दायित्व है, इसलिए संधि-समझौतों को अस्वीकार कर दो, संगठित हो जाओ और उचित समय की प्रतीक्षा में रहो। इसी उद्देश्य से वीरजी ने अपने भाषण के समापन अंश में हिन्दुओं को एक व्यावहारिक कार्यक्रम दिया, हिन्दुओं का सैनिकीकरण, युद्ध सामग्री और अस्त्र-शस्त्र निर्माण के कारखाने बढ़ाना, सभी स्तरों की प्रतिनिधि संस्थाओं पर अधिकार… |