घटना अंकलेश्वर की है। उन दिनों वहाँ तेल की खोज के लिए अनेक कुएँ खोदे गए थे। एक कुएँ में से जब तेल की धारा फूट पड़ी तो सर्वत्र प्रसन्नता की लहर दौड़ गई। तेल की यह धारा हमारे देश के उज्ज्वल भविष्य की प्रतीक थी। पंडित जवाहरलाल नेहरू भी उस कुएँ को देखने के लिए अंकलेश्वर पहुँचे। इस तेल के कुछ धब्बे नेहरूजी की अचकन पर भी पड़ गए। अधिकारियों को चिंता हुई। उन्होंने सलाह दी कि अचकन बदल ली जाए, मगर नेहरूजी ने उसकी कोई आवश्यकता नहीं समझी। इसके विपरीत उन्होंने बड़े गर्व... |