लाला लाजपत राय की मृत्यु: साइमन कमीशन का विरोध करने वालों में लाला लाजपत राय अग्रणी थे। लोगों का हुजूम सड़कों पर साइमन कमीशन के खिलाफ नारेबाजी कर रहा था। अँग्रेजों ने उस भीड़ को काबू करने के लिए बेताहाशा लाठियाँ चलाईं और उस लाठीचार्ज में घायल लाला लाजपत राय की 17 नवंबर, 1928 को मृत्यु हो गई।
भारत छोड़ो आंदोलन :
गाँधीजी के नेतृत्व में भारतीय जनता ने अहिंसक विरोध का फैसला किया। ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ अँग्रेजों के लिए भय का कारण बनने लगा था। इसे असफल बनाने की पुरजोर कोशिश की गई। गाँधीजी सहित देश के अन्य अग्रणी नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया।
अंतरिम मंत्रिमंडल का गठन : सितंबर, 1946 में काँग्रेस ने जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में अंतरिम मंत्रिमंडल का गठन किया। मुस्लिम लीग भी बेमन से मंत्रिमंडल में शामिल हो गई, लेकिन उन्होंने संविधान सभा का विरोध किया।
विभाजन की घोषणा और खून का सैलाब: 20 फरवरी, 1947 को ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने घोषणा की थी कि वे जून, 1948 तक भारत छोड़ देंगे, लेकिन आजादी मिलने के पहले ही उस पर ग्रहण लग गया। अगस्त, 1946 में पूरे देश में बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक दंगे शुरू हो गए। गाँधीजी इन दंगों से काफी व्यथित हुए और इसे रोकने के लिए पूर्वी बंगाल और बिहार की पैदल यात्रा की।
आजादी आई आधी रात : मार्च, 1947 को वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन ने काँग्रेस और मुस्लिम लीग के साथ परस्पर बातचीत के बाद यह कहा- ‘भारत को केवल आजादी नहीं मिलेगी, बल्कि उसका विभाजन किया जाएगा। पाकिस्तान और भारत दो अलग राष्ट्र बनेंगे। अंतत: 14 अगस्त, 1947 की रात भारत दो हिस्सों में बँट गया। 15 अगस्त को भारतीयों ने अपना पहला स्वतंत्रता दिवस मनाया, जबकि पाकिस्तान ने 14 अगस्त को।
हे राम: पूरा देश एक पल को स्तब्ध रह गया। 30 जनवरी, 1948 को जब नाथूराम गोडसे की गोली राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के सीने को चीरती हुई निकल गई और केवल एक वाक्य गूँजता रह गया - हे राम!
- प्रस्तुति : नीहारिका झा
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