मुख्य पृष्ठ > विविध > वेबदुनिया विशेष 07 > स्वतंत्रता दिवस
सुझाव/प्रतिक्रियामित्र को भेजियेयह पेज प्रिंट करें
 
ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ जब लहराया था परचम
जंग-ए-आजादी की प्रमुख घटनाओं पर एक नजर
पहला सत्याग्रह - चंपारण:
NDND
1917 में गाँधीजी के नेतृत्व में सबसे पहले बिहार के चंपारण जिले में सत्याग्रह आंदोलन की शुरुआत हुई। नील की खेती करने वाले किसानों पर हो रहे घोर अत्याचार के विरोध में यह सत्याग्रह शुरू किया गया था

भारत सरकार कानून:
1918 में ब्रिटिश सरकार के भारत मंत्री एडविन मांटेग्यू और वायसराय लॉर्ड चेम्सफोर्ड ने संवैधानिक सुधारों की प्रस्तावना रखी, जिसके आधार पर 1919 का भारत सरकार कानून बनाया गया।

रौलेट एक्ट:
मार्च, 1919 में रौलेट एक्ट बना। इस कानून के तहत यह प्रावधान था कि किसी भी भारतीय पर अदालत में मुकदमा चलाया जा सकता है और बिना दंड दिए उसे जेल में बंद किया जा सकता है। इस एक्‍ट के विरोध में देशव्यापी हड़तालें, जूलूस और प्रदर्शन होने लगे। ‍गाँधीजी ने व्यापक हड़ताल का आह्वान किया।

जलियाँवाला बाग :
13 अप्रैल को डॉ. सैफुद्दीन किचलू और डॉ. सत्यपाल की गिरफ्तारी के विरोध में जलियाँवाला बाग में लोगों की भीड़ इकट्ठा हुई। अमृतसर में तैनात फौजी कमांडर जनरल डायर ने उस भीड़ पर अंधाधुंध गोलियाँ चलवाईं। हजारों लोग मारे गए। भीड़ में महिलाएँ और बच्‍चे भी थे। यह घटना ब्रिटिश हुकूमत के काले अध्‍यायों में से एक है।


खिलाफत आंदोलन बदला असहयोग में:
NDND
गहरे असंतोष के कारण लोगों ने खिलाफत आंदोलन की शुरूआत की थी। जून, 1920 में इलाहाबाद में एक सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें स्कूलों, कॉलेजों और अदालतों के बहिष्कार की योजना बनी। यह खिलाफत आंदोलन 31 अगस्त, 1920 को असहयोग आंदोलन में बदल गया।

- 1 अगस्त को स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी नेता लोकमान्य तिलक का निधन हो गया।

- असहयोग आंदोलन चलाने के लिए स्वराज्य कोष की स्थापना की गई, जिसमें 6 महीने के अंदर ही 1 करोड़ रुपए जमा हो गए।

- चौरी-चौरा नामक स्थान पर लगभग 3,000 किसानों के काँग्रेसी जूलूस पर पुलिस ने गोलियाँ बरसाईं।

- दिसंबर में दास और मोतीलाल नेहरू ने मिलकर स्वराज पार्टी की स्थापना की और मोतीलाल को अध्यक्ष बनाया गया।

- जून, 1925 को आजादी की लड़ाई के एक और अग्रणी नेता चित्तरंजन दास का निधन हो गया

‘साइमन, गो बै’ :
NDND
नवंबर 1927 में साइमन कमीशन भारत आया, जिसका उद्देश्य संवैधानिक सुधारों को लागू करना था। लोगों ने इसका काफी विरोध किया और ‘साइमन गो बै’ के नारे लगाए।
<< 1 | 2 | 3 | 4 | 5  >>  
और भी
आत्‍मनिर्भरता की दिशा में बढ़ते कदम
भारत में सूचना-क्रांति की नई तस्वीर
जब्‍तशुदा नज्‍में
सरफरोशी की तमन्‍ना
कलम आज उनकी जय बोल
राष्ट्र-गान और राष्ट्रीय ध्वज