सांडर्स की हत्या: लाला लाजपत राय मौत से बौखलाए भगत सिंह ने 17 दिसंबर को अँग्रेज पुलिस अधिकारी सांडर्स की हत्या कर दी।
किसानों का बारदोली आंदोलन: 1929 में वल्लभाभई पटेल के नेतृत्व में बारदोली के किसानों ने आंदोलन चलाया।
जवाहर लाल नेहरू अध्यक्ष: - लाहौर अधिवेशन में जवाहरलाल नेहरू को काँग्रेस का अध्यक्ष चुना गया। - 31 दिसंबर को स्वाधीनता का स्वीकृत झंडा फहराया गया।
चंद्रशेखर आजाद की शहादत: 27 फरवरी को इलाहाबाद के एल्फ्रेड पार्क में अँग्रेजों की गिरफ्तारी से बचने के लिए चँद्रशेखर आजाद ने खुद को गोली मार ली और इस तरह आजादी का एक वीर सिपाही शहीद हो गया।
दांडी यात्रा और नमक-कानून: 12 मार्च 1930 को गाँधीजी और उनके 78 अनुयायी दांडी की 200 किलोमीटर की यात्रा पूरी कर समुद्र तट पर पहुँचे और नमक-कानून तोड़ा। यह दूसरा अवज्ञा आंदोलन माना जाता है।
असेंबली में बम: 8 अप्रैल को भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने असेंबली में बम फेंका। उनका उद्देश्य किसी को मारना नहीं था, बल्कि लोगों तक अपनी आवाज पहुँचाना था।
ऐतिहासिक भूख-हड़ताल: जतीन दास और उनके साथियों ने लाहौर में कैद के दौरान जेल प्रशासन के अत्याचार के खिलाफ भूख हड़ताल रखी। यह भूख-हड़ताल 63 दिनों तक चली, जिसमें जतीन दास की मृत्यु हो गई। तीन वीरों को फाँसी : 31 मार्च, 1931 को भगत सिंह, राजगुरू और सुखदेव को फाँसी पर लटका दिया गया और ये तीनों वीर ‘मेरा रंग दे बसंती चोला’ गाते हुए खुशी-खुशी फाँसी के फंदे पर झूल गए।
कैदियों को छोड़ने का प्रस्ताव : मार्च में ही गाँधी-इरविन समझौता हुआ। इसके तहत यह प्रस्ताव रखा गया कि अहिंसक व्यवहार करने वाले कैदियों को छोड़ने की अनुमति सरकार दे।
गोलमेज सम्मेलन : - 1930 में लंदन में भारतीय नेताओं और प्रवक्ताओं का पहला गोलमेज-सम्मेलन आयोजित किया गया। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य साइमन-कमीशन की रिपोर्ट पर विचार करना था।
- 1931 में गाँधीजी दूसरे गोलमेज सम्मेलन में हिस्सा लेने इंग्लैंड पहुँचे।
- नवंबर, 1932 में काँग्रेस तीसरे गोलमेज सम्मेलन में सम्मिलित नहीं हुई। इस सम्मेलन का परिणाम 1935 के भारत सरकार कानून के रूप में सामने आया।
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