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गाँधीजी को श्रद्धांजलि
महान परंपरा के वारिस
- सी. राजगोपालाचारी

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भारतमाता पूरी पराजय पर वेदना और दर्द से तड़प उठी है। कोई भी व्‍यक्ति भारतमाता और भारतीयों को महात्‍मा गाँधी से अधिक प्‍यार नहीं करता। दिल्‍ली में जो हादसा हुआ उसने भारत के लोगों को आगामी इतिहास के लिए आवाज, कारण तुक और स्‍वर प्रदान किया। मैं प्रार्थना करता हूँ कि भारत का इतिहास सुर और ताल के साथ लिखा जाएगा जिसका सार होगा कि यदि महात्‍मा गाँधी असफल हुए तो भारतमाता भी असफल हो जाएगी

कोई भी गाँधी से महान मृत्‍यु को प्राप्‍त नहीं कर सकता है। वो अपनी प्रार्थना की जगह पर गए अपने राम से बात करने। उनकी मृत्‍यु कभी भी गरम पानी, डॉक्‍टर्स या नर्स को बुलाते हुए बिस्‍तर पर नहीं हो सकती। वो कभी भबिस्‍तर पर बीमार पड़े आधे-अधूरे शब्‍द बोलते हुए नहीं मर सकते। वो खड़े-खड़े मरे, यहाँ तक कि नीचे बैठे हुए। राम भी उन्‍हें ले जाने के लिए उत्‍सुक थे जब तक कि वो अपनी प्रार्थना वाली जगह पर पहुँचते

जब सुकरात अपने विचारों के लिए मरे और क्राइस्‍ट अपने विश्‍वास के लिए, उनका विश्‍वास था कि उनके जैसा कोई और उदाहरण प्रस्‍तुत नहीं कर सकता।

ईश्‍वर का वह व्‍यक्ति धरती पर जिसके पदचिहृ हैं
- पंडित जवाहारलाल नेहर

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महान व्‍यक्तियों और प्रतापी व्‍यक्तियों की कांस्‍य और मार्बल की प्रतिमा स्‍थापित की जाती है, लेकिन उस ईश्‍वरीय व्‍यक्ति ने अपने पूरे जीवनकाल में क्रांतिकारी प्रबंधन किए हैं, जोकि करोड़ों और करोड़ो लोगों के दिलों में रच-बस गए हैं, इसलिए हम सभी थोड़े-बहुत वैसे हो जाएँ जिससे वो बने थे, फिर भी अनंत का तुच्‍छ हिस्‍सा हैं। उनका विस्‍तार पूरे भारत में था, केवल जगहों पर या किसी चुनिंदा स्‍थानों पर, या एसेंबली में नहीं, लेकिन प्रत्‍येक गाँव में और उन दबे-कुचले लोगों के हृदय में और उन लोगों में जो दु:खी हैं। वो करोड़ों लोगों के दिलों में रहते हैं और हमेशा रहेंगे।

...वो चले गए, और पूरे देश की यही भावना है कि वो इसे सूना और उजाड़ छोड़ गए। सबका दिमाग यह महसूस करता है और मुझे नहीं पता हम कब तक इससे मुक्‍त होने में सक्षम हो पाएँगे, और अब इस भावना के साथ ही गर्व के भाव के साथ धन्‍यवाद दे रहे हैं कि इस पीढ़ी को ऐसे पराक्रमी व्‍यक्ति से जुड़ने का मौका मिला। आने वाले समय में, शता‍ब्दियों और कई सहस्‍त्राब्दियों के बाद, लोग इस पीढ़ी के बारे में सोचेंगे जब ईश्‍वर का वह मनुष्‍य पृथ्‍वी पर अपने चिहृ छोड़ गए और सोचेंगे कौन थे वो ? , किस प्रकार छोटे, भी उनकी राह पर चलेंगे और हो सकता है इस पवित्र धरती पर जहाँ उनके कदमों के निशां मौजूद हों। आइए उनके प्रति मूल्‍यवान बनें। आइए हमेशा वैसे ही रहें।
...वो चले गए, और पूरे देश की यही भावना है कि वो इसे सूना और उजाड़ छोड़ गए। सबका दिमाग यह महसूस करता है और मुझे नहीं पता हम कब तक इससे मुक्‍त होने में सक्षम हो पाएँगे, और अब इस भावना के साथ ही गर्व के भाव के साथ धन्‍यवाद दे रहे हैं कि इस पीढ़ी को ऐसे



उनके महान बलिदान हमारे अन्‍त:करण को सचेत करेंग
- सरदार वल्‍लभभाई पटे

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यद्यपि वे अनश्‍वर हैं फिर भी आज वे राख में तब्‍दील हो जाएँगे, शाम के 4 बजे, गाँधीजी के अविनाशी शिक्षाएँ हमेशा हमारे साथ रहेंगी। यहाँ तक कि मैंने महसूस किया है कि गाँधीजी के न खत्‍म होने वाला उत्‍साह अभी भी हमारे आस-पास मौजूद है और भविष्‍य में भी देश की सत्‍ता की बराबर निगरानी करता रहेगा।

जिस पागल युवा ने उनकी हत्‍या कर दी थी यदि वह सोचता है कि ऐसा करके वह उनके पवित्र मिशन को नष्‍ट कर देगा तो वह गलत था। शायद भगवान भी गाँधीजी के मिशन को पूरा करना चाहते थे और उनकी मृत्‍यु के बाद भी खुशियाँ कायम रखना चाहते थे।
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