इजहार-ए-इश्क | प्रेम कथाएँ | रोमांस कार्ड्स | डेटिंग क्लब | प्रेम-गीत | ज्योतिष | हँसगुल्ले इश्क के | पाती प्रेम की | प्रेम गुरु
मुख पृष्ठ » विविध » रोमांस » प्रेम-गीत » सौंधी-सौंधी आँखों से (Romance love letter)
Feedback Print Bookmark and Share
 
मैंने तुम्हारे प्रेम पत्र जला दिए सवानी!
मैं तुम्हारे नमक का कर्जदार रहूँगा

सावनी!
धू-धू जल नहीं मरा
तुम्हारा कोई भी खत,
भस्म होते सैकड़ों सपनों की राख से
एक वामदेव

फिर जाग उठा साथ-साथ
जब सतरंगी-सुरमई-जलतरंग आँखों में
दुनिया जहान की आग तैर आई थी...

हालाँकि
उस क्षण मैं पानी-पानी बहुत था
पर
ज्वार में पहली चाप
जानती हो किसकी थी?

तुम्हारी ही बरौनियों से टपके
उस दर्द की
जिसे मैं तन्हा गिरने नहीं देना चाहता

सावनी!
तुम्हारे सपनों का घर
दुनिया से बाहर है क्या
नहीं तो
कहाँ इसके माकूल जमीन है?

आदमी के जीने को
उम्र ही काफी नहीं
उम्र भर का सूर्य
मय चाँद-तारे चाहिए
कहो,
खतरे उठाने को तैयार हो...?
सौजन्य से - नया ज्ञानोदय
संबंधित जानकारी खोजें