मुख पृष्ठ > विविध > रोमांस > प्रेम-गीत > तुम तो नीरे पतझड़ हो
सुझाव/प्रतिक्रियामित्र को भेजिएयह पेज प्रिंट करें
 
तुम तो नीरे पतझड़ हो
फागुन के बहाने
तुम्हें याद करते हुए
मैं बहुत प्रफुल्लित हूँ
क्योंकि मेरे पास
फागुन है
तुम नहीं तो क्या
मुझे तुम रुला सकते हो
पर फागुन कभी नहीं
अब देखो न
तुम सिर्फ एक वर्ष में
मुझे छोड़कर चले गए
और फागुन
हर साल की तरह
मेरे पास है
फागुन के बहाने तुम्हें
याद किया जा सकता है
पर तुम्हारे बहाने
तो फागुन याद आने से रहा
तुम तो नीरे पतझड़ हो।
संबंधित जानकारी खोजें
और भी
गुजर गई हूँ मैं...!
फिर एक कहानी अधूरी
तुम ही कुछ लिखो
तलाश है मुझे
एक नन्ही कविता
हृदय की शांति के लिए