मुख पृष्ठ > विविध > रोमांस > प्रेम-गीत > मेरी जीवनसंगिनी
सुझाव/प्रतिक्रियामित्र को भेजिएयह पेज प्रिंट करें
 
मेरी जीवनसंगिनी
गायत्री शर्मा
प्यार
NDND
अँधेरी‍ रात में
जगमगाता दिया हो तुम
मेरी जीवनसंगिनी
मेरी प्राणप्रिया हो तुम

थामा है तुमने
जब से मेरा हाथ
तबसे जागी है मुझमें
जीवन जीने की आस

उम्र का यह पड़ाव
नहीं लगता अब मुझे भारी
गर मिलो तुम हर जनम
तो हँस के रूखसती की
कर लूँ मैं तैयारी

साथी चले हो तुम
दो कदम साथ
तो जीवनभर साथ निभाना
तन्हाई में छोड़ अकेला मुझे
तुम कहीं चली ना जाना।
संबंधित जानकारी खोजें
और भी
कौन है तू ...
एक दीया तेरे लिए
आज भी मुझे याद है..
तू नाराज है मुझसे
अब तुम रोते क्यों नहीं...?
याद तेरी और हमारी करवटें