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कौन है तू ...
रहता है तेरा इंतजार
गायत्री शर्मा
कौन है तू
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हर सुबह, हर शाम
जब खोलता हूँ आँखे
तो तू ही नजर आती है

शरमाकर चुपचाप
मेरे आगोश में छुप जाती है।

तुझे धूप कहूँ या छाँव
तुझे गीत कहूँ या राग

छुईमुई सी है तू
जो छूते ही सिमट जाती है
हर रात सपनों में
तू मेरी बनकर आती है।

जब देखता हूँ आइने में
तो तेरी ही सूरत
हर लड़की में दिखती है मुझे
तेरी ही मूरत
तू जादू है या हकीकत
कुछ समझ नहीं आता है
हर रात मुझे नींद से
कोई आकर जगाता है।
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