मानसी हेलो दोस्तो! हर समय हम क्यों तमाम बातों को लेकर जरूरत से ज्यादा गंभीर रहते हैं। रिश्तों को लेकर तो हम इतने गंभीर हो जाते हैं कि उसका मौज-मस्ती और दिल्लगी वाला पक्ष बिल्कुल ही गायब हो जाता है। प्यार में किसी का झूठ पकड़ा गया तो प्रेमियों के लिए यही नाराजगी का कारण बन जाता है। हफ्ते भर यही किच-किच चलती रहती है कि मजबूरी थी तो भला आखिर कैसी मजबूरी थी। इस तफ्तीश में रिश्ते की ऐसी फजीहत होती है कि मानों इस बेसिर-पैर का मुकदमा लड़ने से सूली पर चढ़ना ज्यादा आसान हो। अब भला इससे कौन इनकार कर सकता है कि झूठ बोलना, धोखा देना, बेवफाई करना आदि नहीं चल सकता है। प्रेम के रिश्ते में कोई यदि यह गलतियाँ बार-बार दुहरा रहा है तो क्या करना चाहिए? अरे बाबा आप तो फिर गंभीर हो गए। घबराने वाली कोई बात नहीं है। हो सकता है, वह उसके व्यक्तित्व का हिस्सा हो। और आपका व्यक्तित्व बिल्कुल उसके उलट। आप और आपका साथी एक-दूसरे को मैच कर रहे हैं कि नहीं यह जानने का फॉर्मूला भी निकाल लिया गया है।कहते हैं न कि इश्क एक आग का दरिया है और तैर कर जाना है। आज हम पेश करेंगे आपके सामने एक "फन फॉर्मूला" जिसे आप आजमाएँ और अपने एकरसता भरे नीरस रिश्ते को बनाएँ सरस एवं मजेदार। यह फन फॉर्मूला वाली जाँच दोनों के लिए है। तैयार हैं आप। पेश है आपके समक्ष प्रश्नों की सूची। नियम भी आपको बता रही हूँ। इस टेस्ट से आपको पता चल जाएगा कि आप दोनों की जोड़ी कितनी मैच हो रही है। तो कलम उठाएँ और तैयार हो जाएँ।हर प्रश्न के सामने जवाबों के विकल्प दिए गए हैं। सही जवाब को एक कागज पर या फाइल पर लिखते जाएँ।श्रेणी-१* मैं तो बस तत्काल ही काम कर डालता हूँ :- पूर्णतः असहमत, असहमत, सहमत, पूर्णतः सहमत* मेरी रुचियों का क्षेत्र व्यापक है : - पूर्णतः असहमत, असहमत, सहमत, पूर्णतः सहमत* अन्य के मुकाबले मुझमें अधिक ऊर्जा है : - पूर्णतः असहमत, असहमत, सहमत, पूर्णतः सहमतश्रेणी-२* लोगों को प्रचलित पैमाने के अनुरूप ही व्यवहार करना चाहिए :- पूर्णतः असहमत, असहमत, सहमत, पूर्णतः सहमत* आमतौर पर मैं मानता हूं कि नियम-कायदे को पालन करना जरूरी है :- पूर्णतः असहमत, असहमत, सहमत, पूर्णतः सहमत* मेरे दोस्त और परिवार वाले कहेंगे कि मुझमें परंपरावादी मूल्य हैं : - पूर्णतः असहमत, असहमत, सहमत, पूर्णतः सहमत |