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धीरे-धीरे प्यार को बढ़ाना है
* हर त्योहार जैसे दिवाली, दशहरा, क्रिसमस, होली आदि पर विश करने से काम नहीं चलेगा। सस्ता सा ग्रीटिंग कार्ड ही बधाइयों के साथ दें। तो बात बन जाएगी। ग्रीटिंग कभी न दें तो हाथ से कागज पर प्रेम के दो बोल ही लिखकर दे दें। अलग इम्प्रेशन पड़ेगा।

* जी हाँ! सुबह प्यार से पकड़कर गुडमॉर्निंग भी कहा जा सकता है। या किचन में काम कर रही हों तो पीछे से चुपचाप उन्हें पकड़कर अचंभित भी कर सकते हैं। या उनकी आँखें बंद कर दें। बातें छोटी सी हैं लेकिन आप इन्हें आजमाकर देखें बहुत फर्क पड़ेगा आपके दैनिक जीवन पर। और श्रीमतीजी या श्रीमानजी को शिकायत भी नहीं रहेगी कि हसबैंड तो होते ही ऐसे हैं। इनके पास तो मेरे लिए टाइम ही नहीं है। बस दोस्त और ऑफिस ही दिखाई देता है। और भाभीजी आप भी जब भाई साहब दिमाग से ऑफिस में ही हों तो उनके पास बैठकर उन्हें घर पर वापस बुला सकती हैं।

* हमेशा टीवी पर अपनी पसंद के नाटक या चैनल को लेकर जिद न करें कि अभी तो मुझे अपना 'सास-बहू' वाला नाटक या 'कहानी घर-घर की' देखना है तुम जाकर दूसरे रूम में टीवी देख लो। इसके बजाय कुछ नहीं तो साथ बैठकर टीवी पर अपना पसंदीदा धारावाहिक एक-दूसरे को दिखाएँ और पात्रों के बारे में भी समझाएँ। इससे दोनों एक-दूसरे के कार्यक्रमों में रुचि लेने लगेंगे और कलह का एक बिंदु खत्म हो जाएगा।

* घर निकलने के टाइम पर कभी ऑफिस से सीधे फोन पर बता दें कि आज घर पहुँचते ही हम शॉपिंग पर जा रहे हैं या डिनर के लिए होटल जा रहे हैं। थोड़ा समय अपने अनुसार चुन लें नहीं तो श्रीमतीजी नाराज ना हो जाएँ कि आपकी पसंद की सब्जी बनाई है और आपको आज ही होटल जाना सूझ रहा है।

* जिस दिन श्रीमतीजी सोच रही हों कि आज आप गुस्सा हो सकते हैं या डाँट पिटने वाली है, क्योंकि सब्जी में नमक डाला नहीं और लंच बॉक्स में रख दी तो वही बात हँसकर टेकल कर लें कि क्या हुआ रोज तो नमक डालती ही हो। एक दिन भूल गई तो क्या हो गया। ऑफिस में भी मिल जाता है नमक तो। इसमें भला गुस्सा होने वाली कौन सी बात है।

* किसी दिन बच्चों का होमवर्क खुद ही करा दें। बीवी को मक्खन भी लग जाएगा और आपको भी पता पड़ेगा कि घर पर वह किन-किन समस्याओं से 2-4 होती रहती हैं और आपकी गफलत दूर हो जाएगी कि घर पर ये खाना बनाने के अलावा करती क्या हैं।

* संडे वाले दिन बीवी के कामों में हाथ बँटा लें। बीवी भी खुश और छुट्‍टी का सदुपयोग भी हो जाएगा। शाम को जल्दी काम हो जाने पर आराम से घूमने जा सकते हैं।

* किसी दिन श्रीमतीजी की साड़ी की तारीफ कर दें या सुंदर दिख रही हैं तो ही मान लीजिए कुछ हफ्तों की गिफ्‍ट का काम करेगी। कह दीजिए लंच की डिश की तारीफ मेरे दोस्त भी कर रहे थे। तो आपको भी आए दिन बढ़िया डिश मिल जाएगी और वह भी खुशी-खुशी बड़े शौक से बनी हुई। भाभीजी भी आग्रह किए बिना नहीं रहेंगी कि गाजर का हलवा रख दिया है या इडली रखी है दोस्तों को भी खिलाना।

* सप्ताह में यदि रोज नहीं तो कम से कम 2-3 दिन शाम को समय निकालकर टहलते हुए आसपास मंदिर जा सकते हैं या किसी गार्डन में बैठ सकते हैं। मजबूरी में यदि नहीं जा सकते तो टेरेस तो खाली पड़ा ही है। जहाँ बैठकर फुर्सत के पलों में वे बातें कर सकते हैं जो दोनों को किचन या ऑफिस की तैयारी में व्यस्त होने के कारण नहीं हो पा रही थीं।

* किसी बात पर अनबन हो भी जाए, दोनों की बात बंद है। ठीक ढंग से बोल नहीं रहे हैं। तो दोनों ही बैठकर समस्या का पता लगाएँ और उसका उचित हल ढूँढें। बजाय घर के किसी अन्य सदस्य से इस बारे में बात करने के। क्योंकि प्रॉब्लम आपकी है और तकलीफ भी आप दोनों ही उठाएँगे। इसलिए अनावश्यक रूप से किसी को भी हस्तक्षेप न करने दें।

ये कलह वाले बिंदु हैं तो छोटे। लेकिन जब बात आगे बढ़ जाती है तो आपको भी पछतावा होता है कि जरा सी बात थी आज यहाँ तक क्यों जा पहुँची है कि तलाक की नौबत आ रही है। या हमारे पीछे बच्चे भी परेशान हो रहे हैं। ये समस्याएँ हर वर्ग के युगल के सामने आती हैं। लेकिन यह हल भी तो सभी के पास है किसी के पास बड़े लेवल का तो किसी के पास छोटे लेवल का। इन उपायों को अपनाइए फिर आप भी कहेंगे हींग लगी ना फिटकरी और रंग भी चोखा आ रहा है।
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