- विशाल मिश्रा
पति-पत्नी का रिश्ता एक ऐसा रिश्ता है जिसे अनेक जिम्मेदारियों के साथ, एक-दूसरे को समझते हुए निभाना होता है। इसके अलावा यदि किसी अन्य रिश्ते की बात करें तो उससे शायद एक ही परिवार प्रभावित होता है। लेकिन पति-पत्नी को माँ-बाप, सास-श्वसुर, देवर-ननद, साला-साली, भाई-बहन के रूप में दो परिवारों को साथ लेकर चलना होता है।
या इसे यूँ कहें जीवन के सफर में चल रही इन दो पहियों की गाड़ी के रास्ते में पगडंडियाँ, खराब रास्ता तो होता है गाड़ी के बीच-बीच में खराब होने की आशंका आदि बनी रहती है। पूरे समय यह रिश्ता सुई की नोक या तलवार की धार पर टिका नजर आता है।
आज हम देखते ही हैं छोटी-छोटी बातें घर की चहारदीवारी से निकलकर कोर्ट-कचहरी तक पहुँच जाती हैं। जबकि दोनों (पति-पत्नी) चाहें तो न केवल इस स्थिति से बच सकते हैं बल्कि एक आनंदमय जीवन बेहतर ढंग से व्यतीत कर सकते हैं जिससे यह सफर आनंदपूर्वक कट जाएगा और पता भी नहीं चलेगा कि शादी के बाद कितने वर्ष यूँ ही निकल गए। | | पति-पत्नी का रिश्ता एक ऐसा रिश्ता है जिसे अनेक जिम्मेदारियों के साथ, एक-दूसरे को समझते हुए निभाना होता है। इसके अलावा यदि किसी अन्य रिश्ते की बात करें तो उससे शायद एक ही परिवार प्रभावित होता है। |
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इसके लिए जरूरी है कि पत्नी पतिदेव का और पतिदेव पत्नी का ख्याल रखें। हम ऐसा नहीं कह रहे कि आप अभी एक-दूसरे का ध्यान नहीं रखते या आपस में सामंजस्य बैठाकर नहीं चलते। एक-दूसरे की आवश्यकताओं और मदद के अलावा इन छोटी-छोटी बातों को भी ध्यान रखें।
* पत्नी को कभी सरप्राइज गिफ्ट लाकर दे दें। उपहार आखिर उपहार होता है उसका मूल्य से वास्ता नहीं होता। यदि आप मौके-बेमौके तोहफा लाकर देते हैं तो दोनों को एक अलग ही अहसास होगा। चाहे वह छोटा सा शो पीस, परफ्यूम ही क्यों न हो। कोशिश करें यह छोटा तोहफा किसी ऐसे अवसर पर ले आएँ ताकिलेने वाले ने इसकी अपेक्षा भी नहीं की होगी।
* साड़ी या सलवार सूट जब भी लेने जाएँ और श्रीमतीजी एक ही एक्सपेक्ट कर रही हों तब उन्हें या तो दो दिला दें या फिर एक ही और ज्यादा कीमत का दिला दें। जिसे शायद वे महँगा होने के लिहाज से मन मारकर न कह रही हों।
* ऐसा भी नहीं कि यह गिफ्ट आप श्रीमतीजी या श्रीमानजी के ही काम में लाने वाला लाएँ। इसे घर में कोई काम की चीज हो, तो भी ला सकते हैं। जैसे रूम फ्रेशनर, कर्टन्स, टेबल पर या ड्रेसिंग टेबल में रखने का सामान आदि।
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