लिव इन रिलेशनशिप के जमाने में सगाई और शादी के बीच के समय में लड़के-लड़कीका शारीरिक संबंध होना अचरज की बात नहीं लगती। सगाई की अँगूठी के एक्सचेंज होते ही परिवार व समाज की सहमति की आड़ में अपने जीवनसाथी को जाने समझने की लालसा में दो जवाँ दिलों का बेखौफ, बरोकटोक तन्हाई में मिलना उन कीशारीरिक जरूरतों को हवा देता है।
बेसब्र प्रेमी का रूप धरे जब मँगेतर अपनी भावी पत्नी के साथ थोड़ा फिजिकल होना चाहता है तो शर्म, झिझक व लोकलाज से शुरू-शुरू में लड़की 'नहीं-नहीं' अभी नहीं, शादी के बाद' का राग अलापती जरूर है पर नए-नए प्रेम का उबाल और भावी पति का लगातार मनुहार उसे घुटने टेकने को मजबूर कर देता है। 'क्या फर्क पड़ता है? कुछ ही दिनों में मेरी इससे शादी हो जाएगी' जैसी सोच उन्हें बहका कर लाइन आफ कंट्रोल लाँघने को मजबूर कर देती है।
जो जोड़े सगाई के बाद अलग-अलग शहरों में रह रहे होते हैं वे फोन पर लंबी मीठी-मीठी रोमांटिक बातों के जरिए, पत्राचार, इंटरनेट या एसएसएस से अपने प्यार को परवान चढ़ा कर मिलने के नित बहाने तलाशते रहते हैं फिर जब भी मिलना संभव होता है वे अपने प्यार का इजहार करने के लिए तन्हाई तलाशते हैं। कई बार यह तन्हाई उन्हें बहका भी जाती है जबकि प्राइवेसी न मिलने पर ये जोड़े अपने प्यार को चुंबनो, आलिंगनों तक ही सीमित रखते हैं।
जो जोड़े सगाई के बाद एक ही शहर में रहते हैं। उनका मिलना सहज होता है। ये समाज की स्वीकृति की दुहाई दे कर भरपूर सेक्स का आनंद उठाने के लिए जब-तब तैयार रहते हैं।
सगाई और शादी के बीच के समय को लाइफ का बेस्ट टाइम माना जाता है। पर सगाई के बाद मँगेतर के साथ शारीरिक संबंध सही नहीं हैं। यदि आप प्यार को दर्शाना चाहते हैं तो लाखों और भी तरीके हैं जैसे चुंबन, आलिंगन, उपहारों का लेनदेन, रोमांटिक बातें आदि पर सेक्स को शादी के बाद के लिए ही रखें। नहीं करने से नुकसान नहीं है पर करने से ढेरों परेशानियाँ हो सकती हैं। फिर कहावत भी है कि सब्र का फल हमेशा मीठा होता है तो फिर थोड़ा सब्र रखने में हर्ज ही क्या है?
अगर शादी और सगाई के बीच अंतराल अधिक नहीं है, और आप फिजिकल रिलेशन बनाना चाहते हैं तो भावी पत्नी का मन टटोलें। उसे | सगाई और शादी के बीच के समय को लाइफ का बेस्ट टाइम माना जाता है। पर सगाई के बाद मँगेतर के साथ शारीरिक संबंध सही नहीं हैं। |
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डराकर, बहला-फुसला कर या दबाव डाल कर अथवा धोखे से उससे संबंध न बनाएँ। इस से आप अपने दांपत्य जीवन का गला उसे शुरू होने से पहले ही घोट देंगे। यदि यह शारीरिक संबंध में पड़ना नहीं चाहते तो उस की 'न' को सिरमाथे पर रख कर उसे उतना ही प्यार और इज्जत दें जितनी पहले दे रहे थे। इस से आप के प्रति उस की चाहत और बढ़ जाएगी।
पहले जमाने की बात अलग थी तब लव लेटर्स या टेलीफोन अथवा मित्रों के जरिए उन का प्यार पनपता था। लेकिन आज माहौल बिलकुल अलग है। विवाह पूर्व स्थापित ये संबंध कुछ पल आनंद तो देते हैं पर कभी-कभी उम्र भर की तकलीफ भी दे जाते हैं। यानी बिना सोचे-समझे उठाए इस कदम के परिणाम गंभीर भी हो सकते हैं।
मँगेतर के साथ संबंध बनाना आप का निजी मामला तो है पर इसके भयंकर परिणाम भी आपको और आपके परिवार को भुगतने पड़ सकते हैं। इसलिए चतुरता और कुशतला से विवाह पूर्व सेक्स को न कह दें।
आज के माडर्न युग में मात्र एक्सपेरिमेंट के लिए शादी से पहले सेक्स करना आप की शादी को कामयाब नहीं बनाता, क्योंकि कभी-कभी एक पल का बहकना आप का सारा जीवन नष्ट कर सकता है। इसलिए अपने शरीर को स्वस्थ रख कर आने वाले कल को खुशगवार बनाने का प्रयत्न करें।
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