कई-कई रंगों से सजा प्यार कदम-कदम पर अपना रूप दिखाता है। प्यार में पीड़ा तब सघन हो जाती है जब उसे शक की दीमक लग जाती है। यह दीमक प्यार को खोखला कर देती है। जब तक व्यक्ति समझे-संभले प्यार का राजमहल चरमराकर ढह जाता है। 'दोस्तों शक दोस्ती का दुश्मन है अपने दिल में इसे घर बनाने न दो कल तड़पना पड़े याद में जिनकी रोक लो, रूठ कर उनको जाने न दो'
वॉशिंगटन अर्विंग ने कहा है -'प्यार कभी व्यर्थ नहीं जाता यदि उसे प्रतिदान नहीं मिलता है तो वह लौट आता है और ह्रदय को मृदु एवं पावन बनाता है।'
सच्चा प्यार वही है, जिसके साथ होकर हम अपने आपको सर्वाधिक जान सके। जो हमारे निराश क्षणों में आशा का दीप जला दें। जो हमारे कमजोर पलों में उत्साह का मजबूत सहारा बन सकें। जिसकी प्रसन्नता हमारे सृजन की प्रेरणा बन सकें।
अगर चाहते हैं प्यार की सौंधी सुगंध हमें आजीवन महकाती रहे तो उसका महत्व भी आज ही समझना होगा।
अंत में एक कविता प्यार के नाम- - प्यार खुशी का वह दरिया हैं, जो आमंत्रित करता है हमें, - आओ, खूब नहाओं, हँसी-खुशी की, मौज-मस्ती की शंख-सीपियाँ, जेबों में भरकर ले जाओ। आओ, मुझमें डूबकी लगाओ गोता लगाओ खूब नहाओ प्यार का मीठा पानी हाथों में भरकर ले जाओ।
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