* प्रेम जनमों का नाता है
जब प्रेमी अपनी प्रेमिका को सीने से लगता हैं, तो उनके हॉर्मोन का स्तर तेजी से बढ़ता है और गुस्सा दिलाने वाले हॉर्मोन में कमी आ जाती है। इसके साथ ही इससे जुड़े हॉर्मोन जैसे ऑक्सीटोसिन और वासएप्रिसिन का स्त्राव भी बढ़ जाता है। ये हॉर्मोन आपको रिश्ते में निकटता की भावना बढ़ाते हैं।
* प्रेम में संतुष्टि है
प्यार की कोई जुबान नही होती है, जब प्रेमी-प्रेमिका एक दूसरे को प्यार करते हैं, अपनी परवाह दिखाते हैं, तब हॉर्मोन में परिवर्तन के कारण अवसाद नहीं होता और उदास करने वाले कारण दूर रहते हैं। इस काम के लिए जरूरी नहीं कि आप अलग से समय निकालें। प्यार-दुलार के लिए 5 मिनट भी पर्याप्त हैं। यह 5 मिनट का प्यार सेरोटोनिन और ऑक्सीटोन हॉर्मोन को बढ़ाता है, जो खुशी का दोस्त है।
* प्रेम युवा बनाता है
प्रेम को हमेशा साथ रखेंगे, तो यह आपको जीवन के हर आनंद के लिए प्रेरित करेगा। एक अध्ययन के मुताबिक पाया गया कि सप्ताह में चार से पांच बार सेक्स करने वाले सप्ताह में दो बार सेक्स करनेवालों की अपेक्षा ज्यादा स्वस्थ रहते हैं। उनका मानना है कि चरम के समय स्त्रावित होनेवाले टेस्टोस्टेरॉन से पुरुष बलशाली होते हैं। इसी तरह एस्ट्रोजन महिलाओं की त्वचा और बालों की चमक को बढ़ाता है। अर्थात दोनों ही चीजें युवा होने की परिचायक है।
* प्रेम दोस्ती है
संभव है आपके प्रेमी इस बात को सार्वजनिक तौर पर स्वीकार ना करें, लेकिन आपका दोस्ताना साथ उनको बहुत भाता है। और साथ ही सेक्स की भावना को जगाता है और आपके साथी को उत्तेजित करने में सहायता करता है।
* प्रेम संजीवनी है
प्रेम दुआ के साथ दवा भी है। प्रेम के बिलकुल निजी और अंतरंग क्षणों में शरीर 200 प्रतिशत ज्यादा एंड्रोफिंस (यह ऐसा रसायन है, जो शरीर को हल्का महसूस कराता है और व्यक्ति को आंतरिक खुशी का अहसास देता है) बनाता है। सेक्स की क्रियाओं के दौरान एड्रेलिन स्त्रावित होता है, जो सर्दियों के दिनों में जुकाम से बचाता है। कुछ स्त्राव ऐसे भी होते हैं, जिनसे सिर दर्द ठीक होता है और अवसाद से तुरंत छुटकारा मिलता है। यदि सेक्स का अनुभव आनंददायक हो, तो गुस्सैल व्यक्ति भी शांत होने लगता है।
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