हम प्यार के इतने भूखे होते हैं कि कोई सहानुभूति के दो शब्द बोलता है और हम उसे अपना समझ लेते हैं। खासकर जब हम नौजवान हों। उस वक्त दुनियादारी हम ज्यादा जानते नहीं और घाघ लोगों से हमारा वास्ता न पड़ा हो तो बड़ी आसानी से हम किसी भी व्यवहार कुशल व्यक्ति के सहयोग और मदद को अपने जी-जान से लगा लेते हैं। हमें लगता है कि वह हमारा कितना बड़ा शुभचिंतक है। उसे हमारी ...