अंत में रूपर्ट स्नेल ने छात्रों से एक प्रश्न किया : प्रोफसर रूपर्ट : आप लोगों को हिंदी सीखने में कौन-सी चीज सबसे कठिन लगती है? छात्र : मिश्रित क्रिया (कम्पाउण्ड वर्ब)।
प्रोफसर रूपर्ट : क्यों? छात्र : क्योंकि यह समझ में नहीं आता कि कौन-सी क्रिया पहले लगेगी और कौन-सी बाद में। एक सामूहिक हँसी के साथ इस साक्षात्कार सभा का समापन हुआ।
इस साक्षात्कार के बाद शाम 7 बजे 'द फ्लेवर्स ऑफ हिंदी' विषय पर एक पैनल डिस्कशन हुआ, जिसमें प्रोफेसर अश्विनी देव ने भारत की प्राचीन भाषाओं पर प्रकाश डाला और प्रोफेसर रूपर्ट स्नेल ने हिंदी के अनेक सूक्ष्म तथ्यों को विशेष रूप से विश्लेषित किया। छात्र-छात्राओं के प्रश्न-उत्तर के दौर के साथ यह पैनल लगभग 9 बजे समाप्त हुआ। इसके बाद रात्रिभोज का आयोजन था जिसमें कई तरह के भारतीय व्यंजन उपलब्ध थे।
5 अप्रैल 2008 को प्रात: 11.30 बजे छात्रों के बीच हिंदी में एक प्रतियोगिता संपन्न हुई, जिसका विषय था- 'परिवार और परंपराओं की भूलभुलैया में भारतीय व्यक्ति के लिए अपनी पहचान ढूँढ़ना कठिन हो जाता है।'
इसके पक्ष में भाग लेने वाले प्रतियोगी थे- सुयोग भंडारी, कुणाल लुनावत, परमजीत शाह एवं निखिल सूद। इसके विपक्ष में भाग लेने वाले प्रतियोगी थे- महिमा सुखदेव, आशीष बक्षी, सौरिश भट्टाचार्य, अनिला मदिराजू। इसके चेयरपर्सन थे रौनक बाँगरू एवं को-चेयर पर्सन थे दिलशेर कैरन।
इसमें भारत से आए अंतर्राष्ट्रीय छात्रों ने अपना पक्ष प्रस्तुत करते हुए कहा कि 'यह सच है कि परिवार और परंपराओं की भूलभुलैया में हम अपनी पहचान खो बैठते है।' इसके विपक्ष में अमेरिका में जन्में भारतीय मूल के छात्रों ने कहा कि 'यह कथन सही नहीं है, हम अपने परिवार और परंपराओं के परिधि में रहकर ही अपनी पहचान बनाते हैं।' उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि 'उनके परिवार की विशिष्ट संस्कृति एवं परंपराओं के वैविध्य में ही उन्हें उनकी पहचान मिली है।' दोनों पक्षों के छात्रों ने अपनी बात को पूरे जोश और प्रवाह के साथ प्रस्तुत किया। उनके बोलने की धाराप्रवाह शैली में कहीं भी शैथिल्य नजर नहीं आया।
इस प्रतियोगिता की सबसे खास बात यह थी कि इसमें भाग लेने से दो महीने पहले एक आडीशन हुआ था, जिसमें भारत से आए छात्रों ने स्वयं ही अपना पक्ष सामने रखा था।
इस प्रतियोगिता के निर्णायक प्रोफेसर रूपर्ट स्नेल, प्रोफेसर अश्विनी देव, प्रोफेसर सुषम बेदी थे। इसमें निखिल सूद को पक्ष में 'बेस्ट स्पीकर' और 'सौरिश भट्टाचार्य को विपक्ष में 'बेस्ट स्पीकर' तथा आशीष बक्षी को 'बेस्ट एफर्ट इन हिंदी ऐज ए फॉरेन लैंग्वेज' का अवार्ड मिला। कुणाल लुनावत को 'बेस्ट इंटरजेक्टर' का अवार्ड मिला।
साभार- गर्भनाल |