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येल यूनिवर्सिटी में हिंदी गोष्ठी सम्मेलन  Search similar articles
- डॉ. राधा गुप्ता ( हिंदी प्रोफेसर वेसलियन यूनिवर्सिटी, कनै‍‍क्टिकट)

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4 व 5 अप्रैल को येल यूनिवर्सिटी, कनै‍‍क्टिकट में एक भव्य हिंदी गोष्ठी सम्मेलन हिंदी प्रोफेसर श्रीमती सीमा खुराना की अध्यक्षता में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ, जिसके मुख्य अतिथि थे टैक्सास विश्वविद्यालय, आस्टिन के हिंदी प्रोफेसर डॉ. रूपर्ट स्नेल, जिनके द्वारा लिखी गई कई हिंदी पाठ्यपुस्तकें 'टीच योरसेल्फ हिंदी' कई स्तरों में विश्व के लगभग सभी विश्‍वविद्यालयों में पढ़ाई जा रही हैं।

4 अप्रैल 2008 को शाम 6 बजे कॉमन रूम ल्यूस हॉल में प्रोफेसर रूपर्ट स्नेल एवं येल यूनिवर्सिटी के एलीमेंट्री एवं इंटरमीडिएट हिंदी के छात्र तथा वेसलियन विश्‍वविद्यालय से आए कुछ छात्रों के बीच बातचीत हुई। छात्रों ने रूबरू हुए प्रोफेसर रूपर्ट स्नेल से कई प्रश्न पूछे, जिनके उत्तर उन्होंने बड़ी सहजता, सूक्ष्मता एवं कुशाग्रता से दिए। छात्रों द्वारा पूछे गए कुछ प्रश्न इस प्रकार है :

छात्र : हम हिंदी सीखते है तो लेकिन यदि बीच में कुछ दिनों का अंतराल (गैप) पड़ जाए तो हम हिंदी भूल जाते हैं, ऐसा क्यों होता है?
प्रोफसर रूपर्ट : उसे फिर से पढि़ए, बार-बार पुनरावृत्ति (रि‍प‍ीट) करने से आपकी हिंदी अच्छी हो जाएगी।

छात्र : हिंदी भाषा स‍ीख पाना इतना कठिन क्यों है?
प्रोफसर रूपर्ट : क्योंकि हिंदी एक अलग तरह की भाषा है जिसका व्याकरण बड़ा जटिल है और इसमें अन्य भाषाओं की अपेक्षा स्वर और व्यंजन की संख्या भी अधिक हैं।

छात्र : हिंदी पढ़ते या लिखते समय हम है कैसे जानें कि कौन-सा शब्द हिंदी भाषा का है और कौन-सा शब्द उर्दू भाषा का?
प्रोफसर रूपर्ट : हिंदी भाषा हिंदी-उर्दू शब्दों का सम्मिश्रण है। इसमें कुछ फारसी के शब्दों का भी समावेश है, अत: आप हर शब्द को हिंदी समझकर ही पढ़े। 'मित्र' हिंदी शब्द है, जबकि 'दोस्त' उर्दू, दोनों ही हिंदी भाषा में शामिल हैं।

छात्र : आपक‍ी कहानी के अनुसार क्या वास्तव में आपने भारत में कभी अपने से बड़े को 'तुम' कहकर पुकारा था?
प्रोफसर रूपर्ट : हाँ, वृंदावन में राधा-कृष्ण मंदिर में मैंने एक साधु से 'तुम' के लहजे में बात की थी।

छात्र : यहाँ हम हिंदी सीख रहे हैं और भारत में नान हिंदी स्पीकिंग राज्यों में रिक्शेवाले हमारी अँग्रेजी तो समझते हैं, पर हिंदी नहीं समझते फिर हम हिंदी क्यों सीख रहे हैं?
प्रोफसर रूपर्ट : (मुस्कुराते हुए) आज पूरे विश्‍व में अँग्रेजी भाषा का प्रभुत्व है। वैसे भारत के हर प्रांत में लोग स्कूलों में एक अनिवार्य भाषा के रूप में या दूसरी भाषा के रूप में हिंदी सीख रहे हैं। हिंदी फिल्मों के माध्यम से भी लोग हिंदी सीख रहे हैं। अँग्रेजी बोलने वालों को देखकर अँग्रेजियत का जुनून सवार होना स्वाभाविक है।
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