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हिन्दी-यूएसए की प्रतियोगिताएँ संपन्न
हिन्दी के प्रति बढ़ता रुझान
- देवेन्द्र सिंह

GN
वीर रस के कवि के तौर पर स्थापित देवेन्द्र सिंह 1980 से अमेरिका में रहे हैं। राष्ट्रभक्ति से भरी कविताओं को वे ओजपूर्ण वाणी में प्रस्तुत कर लोगों को मंत्रमुग्ध कर देते हैं। 'एक शाम हिन्दी के नाम' तथा 'हिन्दुत्व गर्जन' नाम से इनकी रचनाओं की सीडी और डीवीडी भी उपलब्ध हैं। आपने पश्चिम की पुरवाई नाम से अमेरिका के स्थायी कवियों की कविताओं का संग्रह भी संपादित किया है। हिन्दी को अमेरिकन स्कूलों में द्वितीय भाषा के रूप में लाने के लिए आप लगातार प्रयास कर रहे हैं। आपको नई दिल्ली की अक्षरम, न्यूयॉर्क के वर्ल्ड बिजनेस फोरम, न्यू जर्सी की दशहरा समिति और फ्लोरिडा की हिन्दू यूनिवर्सिटी ने सम्मानित किया है।

गुजरे फरवरी माह में हिन्दी-यूएसए की पाठशालाअओं में उत्सव का माहौल था। अवसर था संस्था द्वारा आयोजित हिन्दी प्रतियोगिता का आयोजन। कड़ाके की सर्दी के बावजूद सुबह से न्यूजर्सी के हिल्सबोरो शहर के पुस्तकालय के प्रांगण में नन्हे-मुन्ने कविता प्रतियोगियों की लंबी-लंबी पंक्तियाँ जमा हो गई थीं।

ये सभी कनिष्ठ समूह के विद्यार्थी थे जो पहली बार कविता प्रतियोगिता में भाग ले रहे थे। पिछले सालों की तरह हिन्दी-यूएसए ने हिन्दी की अनेक प्रतियोगिताओं का आयोजन हिल्सबोरो शहर के पुस्तकालय में किया था।
  कुल 12 हिन्दी पाठशालाएँ इसमें सक्रिय रहीं तथा अनेक शिक्षकों के अतिरिक्त 25 सक्रिय स्वयंसेवक सुबह से रात तक कार्यक्रम के सुचारु संचालन में लगे रहे। हिन्दी महोत्सव की तरह यह कार्यक्रम भी विशाल रूप लेता जा रहा है।      


इसमें चार मुख्य प्रतियोगिताएँ अलग-अलग स्तर के विद्यार्थियों के रखी गई थीं, जिनमें सबसे अधिक काव्य-पाठ प्रतियोगिता लोकप्रिय थी। इसमें 298 बच्चों ने भाग लिया। सबसे अधिक उत्साह सामूहिक गीत प्रतियोगिता में देखने को मिला, जिसमें 29 टीमों ने तीन स्तरों में भाग लिया। प्रत्येक टीम में 10 से लेकर 20 बच्चे थे तथा विभिन्न हिन्दी पाठशालाओं की शिक्षिकाओं ने इन गीतों को तैयार करवाया था।

सुंदर वेशभूषा, साज-सज्जा तथा विभिन्न वाद्यों के साथ दर्शकों से खचाखच भरे कक्ष में बच्चों ने पूरे उत्साह से भक्तिगीत, शिक्षाप्रद गीत, देशभक्ति गीत, सुंदर हिन्दी उच्चारण के साथ प्रस्तुत किए। न्यूयॉर्क शहर से पधारी निर्णायकों की टीम असमंजस में थी कि किसे अधिक अंक दें।

काव्य पाठ तथा सामूहिक गीत प्रतियोगिता समाप्त होते-होते दिन ढल गया। इसके बाद शब्द अंताक्षरी प्रतियोगिता प्रारंभ हुई। इस प्रतियोगिता में आठ हिन्दी पाठशालाओं ने भाग लिया तथा प्रत्येक टीम में 5-5 प्रतियोगी थे।
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