मध्यप्रदेश विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। अभी तो प्रदेश ने रफ्तार पकड़ी है। देखिए, कितनी जल्दी विकसित होता है। हमारे पास प्राकृतिक संसाधनों का भरपूर भंडार है। ऐसे सारे वादों के बीच बाहर से आए निवेशक कुछ असमंजस की स्थिति में हैं।
ये सही है कि समिट के पहले ही दिन सत्तावन हजार चार सौ करोड़ रुपए के निवेश के करार हो चुके हैं, लेकिन इन करारों पर चर्चा काफी समय पहले से ही चल रही थी। नए निवेशक अभी प्रदेश की ओर आकर्षित तो हैं, लेकिन निवेश करें या न करें, यह उलझन लगभग हर दूसरे निवेशक के मन में चल रही है।
वेबदुनिया से खास बातचीत में समिट में शामिल हुए नए निवेशकों का कहना था कि वे पहले इस प्रदेश में भविष्य की संभावनाएँ तलाशेंगे। फिर निवेश करेंगे। मूलतः मध्यप्रदेश से संबंध रखने वाले अमेरिका के लॉस एंजिल्स शहर के रश्मि शाह का कहना था कि वे पिछले दस सालों से लगातार मध्यप्रदेश आ रहे हैं।
वे चैरिटी से संबंधित काम भी कर रहे हैं, लेकिन यहाँ की सड़कों की हालत देखकर वे निवेश करने से हिचक रहे हैं। श्री शाह बताते हैं कि ग्लोबल समिट के बाद उन्हें उम्मीद की किरण नजर आ रही है, लेकिन वे सब देखने-समझने के बाद ही निवेश करेंगे। मेरी इच्छा है कि मैं मध्यप्रदेश में एक नहीं, कई पाँच सितारा होटल खोलूँ। मेरे साझेदार बी.यू. पटेल, जिनके पास हिल्टन, शेरेटन, डेजइन जैसे होटलों की फ्रेंचाइजी है, वे भी इस निवेश के बारे में सोच रहे हैं... देखते हैं, आगे क्या होता है।
वहीं फिनलैंड से आए डेविड गेलकिन समिट से बेहद उत्साहित थे। वे अधिकारियों से निवेश से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा करते नजर आए। डेविड ने वेबदुनिया को बताया कि उनकी कंपनी ह्यूमन रिसोर्स से जुड़े कामों को अंजाम देती है। हम लोगों को ग्लोबल प्रशिक्षण देकर उनके लिए नौकरियों का इंतजाम करते हैं। हम मोबाइल, आईटी जैसे सेक्टरों में भी निवेश करते हैं, लेकिन मैं अभी आपके प्रदेश को समझ रहा हूँ। कल कोई एमओयू तो साइन नहीं करूँगा, लेकिन धीरे-धीरे इस जगह को समझने के बाद मैं यहाँ भी काम करना शुरू करूँगा।
चीनी व्यापारी ली डांग चुंग भी कुछ ऐसी ही उलझन में नजर आए। चुंग का मानना है कि मध्यप्रदेश में अच्छी और सस्ती दर में जमीनें उपलब्ध हैं। चीन में मेरा इंफ्रास्ट्रक्चर, डंपर-रोलर से जुड़ा व्यवसाय है। यदि बात जम गई तो मैं जल्द ही यहाँ निवेश के लिए उत्सुक हूँ। लेकिन कल क्या होगा, यह सोचना अभी बाकी है।
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