- डॉ. सुधा ओम ढींगरा
25 सितंबर 2007 को हिन्दू समाज मंदिर (हैमिल्टन कनाडा) के कवि सम्मेलन के दौरान हुई कहा-सुनी और बाद में हुई हाथा-पाई ने उत्तरी अमेरिका के साहित्यिक अंचलों को हिलाकर रख दिया है। पूरा साहित्यिक समाज इस हिंसक घटना से स्तब्ध है कि कलम के सिपाही और कलम की लड़ाई लड़ने वाले अब हाथा-पाई पर भी उतरने लगे हैं।
कवि सम्मेलन का समय सीमित होने के कारण संचालक श्याम त्रिपाठी (मुख्य संपादक हिंदी चेतना, उत्तरी अमेरिका) ने सभी कवियों से अनुरोध किया कि सिर्फ काव्य-पाठ ही करें, कोई भूमिका या वक्तव्य न दें। समय का सदुपयोग करें। सभी कवियों ने उनके इस निवेदन का पालन किया पर जब स्नेह ठाकुर (वसुधा पत्रिका, कनाडा) की बारी आई तो उन्होंने किसी भी नियम का पालन करने से इंकार कर दिया और जबरन वहाँ आलेख पढ़ना शुरू कर दिया। साथ ही यह भी कहा कि मंदिर वालों ने इस बात पर चुनौती दी तो उन्होंने कवि सम्मेलन की अध्यक्षा रमणिका गुप्ता(भारत से आई विदुषी जिन्होंने आदिवासियों पर महत्वपूर्ण कार्य किए हैं और पुरस्कृत हुई हैं) के ऊपर बात डालते हुए कहा कि वह ऐसा उनके कहने पर कर रही हैं।
रमणिका ने माइक पर इस बात से इंकार कर दिया तो स्नेह ठाकुर ने इसे अपना अपमान समझा और नारी का अपमान कह कर मंच से उतर गईं। उनका ग्रुप एक कोने में बैठा मंत्रणा करता रहा। स्नेह ठाकुर नाराज न रहें, अत: उन्हें पुन: काव्य-पाठ के लिए बुलाया गया। उन्होंने ‘‘नारी का अपमान’’ कविता पढ़ी और उनके एक मित्र ने भी ऐसी ही कविता पढ़ी। तमाम हील-हुज्जत और व्यवधान के बाद कवि सम्मेलन समाप्त हुआ।
इसके ठीक बाद एकान्त पाते ही स्नेह ठाकुर के पति श्याम त्रिपाठी (संचालक) से हाथा-पाई करने लगे और उन्होंने श्याम त्रिपाठी के शरीर पर | रमणिका ने माइक पर इस बात से इंकार कर दिया तो स्नेह ठाकुर ने इसे अपना अपमान समझा और नारी का अपमान कह कर मंच से उतर गईं |
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कई प्रहार किए। अचानक प्रहार को श्याम त्रिपाठी संभाल नहीं पाए। इससे पहले कि उन्हें बात समझ आती स्नेह ठाकुर के पति दुबारा पीटने और अपशब्दों का प्रयोग करने लगे। प्रत्यक्षदर्शियों ने किसी तरह श्याम त्रिपाठी को बचाया।
लज्जाजनक बात यह है कि इतना सब कुछ होने के बाद मंदिर की कार्यकारिणी ने न तो पुलिस ही बुलाई और न ही बुलाने दी और न ही ठाकुर को क्षमा-याचना के लिए कहा। स्नेह ठाकुर के पति यह कहते रहे कि I have no regreats, i will do that again. स्नेह ठाकुर ने भी अपने पति को नहीं रोका। खबर लिखे जाने तक पुलिस केस बन चुका है। ई-पत्रिका (अन्तरजाल) साहित्य कुंज के संपादक सुमन घई जी ने स्नेह ठाकुर को अपनी पत्रिका से निष्कासन की सार्वजनिक घोषणा कर अपना दायित्व निभाते हुए उत्तरी अमेरिका के साहित्यकारों और साहित्य सेवियों से निवेदन किया है कि वे इस तरह के अभद्र व्यवहार की भर्त्सना करें।
जब कलम छोड़ कोई साहित्यकार शारीरिक बल प्रदर्शन द्वारा अपनी बात मनवाना चाहे तो वह यह दर्शाता है कि उसके अंदर संवेदनाएँ, अनुभूतियाँ समाप्त हो आतंकवादी सोच और हिंसक प्रवृत्ति प्रमुख हो गई है, अत: वह साहित्यकार कहलाने के काबिल नहीं है।
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