ऐ पथिक! रख पथ पर पाँव न डर, खेल जिंदगी का दाँव। बाधाओं को झँझोड़ आपत्तियों का मुख मोड़तू दृष्टिगोचर है तू बलशाली हैबदल दे सहरो को तू गाउँ।भटकाएँगे चौराहेपथ भ्रष्ट करें दोराहे निगाहों को मत डिगापकड़ राह चलता चलमिले न जब तक ठाँव।विवश का परिस्थितियों कोसीमाओं को लाँघ काटता चल बँधन उन बंधनों को जो रोके हैं तेरे पाँव। देख तेरी दृढ़ता को राह को भी राह देनी होगी तेरे अटूट विश्वास के आगेसमय को भी मात खानी होगीतू कर ललाट ऊँचा समय से धर पाँव मिल जाएँगे तब तुझको तेरे सपनों के ठाँव। साभार- गर्भनाल |