तीन जरा सा सोच भी लेते अगर अंजाम से पहले, हमें फिर क्यों सजा मिलती, किसी इल्जाम से पहले।
कभी तुम भी झुको, कोशिश करो हमको मनाने की, कभी राधा भी तट पर आ गई थी, श्याम से पहले।
वो लक्ष्मी हो कि सीता हो, कि राधा हो या गौरी हो, तुम्हारा नाम आएगा, हमारे नाम से पहले।
इरादे नेक थे अपने, यकीनन ठीक थी नीयत, दिखाना था मुहूरत भी, हमें, शुभ काम से पहले।
सुबह उठते ही सोचा था, पिएँगे अब नहीं वाते, खुदा ताकत दे ये, तौबा न टूटे शाम से पहले।
साभार- गर्भनाल
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