मुख्य पृष्ठ > विविध > एनआरआई > एनआरआई साहित्य
सुझाव/प्रतिक्रिया मित्र को भेजियेयह पेज प्रिंट करें
 
मिट्टी सोना
- पंकज जैन
ND

मेरे वतन की स्‍मृति, मेरे वतन की मिट्टी है
इस देश की पहचान, इस देश का सोना है
वो मिट्टी बारिश की सौंधी मधुर महक है
यह सोना तो बस बाहरी चमक-दमक है

वो मिट्टी अमर ममता का खजाना है
यह सोना तो आज पाना और कल खोना है
उस मिट्टी के गागर में सर्दियों का ज्ञान सागर है
यह सोना तो मात्र भौतिक-सुख-रत्‍नाकर है

उस मिट्टी के कण-कण से हमारा हर जन्‍म का रिश्‍ता है
इस धरती पर तो हर रिश्‍ता सोने से सस्‍ता है
वो भूमि हर भाषा, हर धर्म, हर विद्या की मूल भूमि है
यह भूमि भी हमारी मातृ-भूमि की खोज की निशानी है।
और भी
अमरीका में भी हिन्‍दी का महत्‍व
रीढ़ सदा सीधी रखना
मेरे प्रगतिशील मित्र
तेरी जो महिमा न्‍यारी
कपास
स्वेटर