अमरीकी सरकार को राष्ट्रीय सुरक्षा भाषा पहल कार्यक्रम बनाने की आवश्यकता क्यों महसूस हुई?
अमरीकी सरकार का मानना है कि विदेशी भाषाएँ सीखने और पढ़ाने में कमजोरी का अमरीका की राष्ट्रीय सुरक्षा, कूटनीति, कानून व्यवस्था और सांस्कृतिक समझ पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। इस कमी के चलते हम विदेशी मीडिया से प्रभावी संवाद नहीं कर पाते, आतंकवाद का मुकाबला करने की हमारी कोशिशों पर आघात लगता है, युद्ध झेल चुके क्षेत्रों के निवासियों और सरकारों के साथ काम करने की हमारी क्षमता पंगु हो जाती है और आपसी समझ भी नहीं बढ़ पाती। इसके अलावा विदेशों में प्रभावी संबंध बनाने और नए बाजारों सेजुड़ने की व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा में भी रुकावटें आती हैं। इस चिंता का मुख्य कारण अमेरिका को इराक और अफगानिस्तान में आतंकवाद के खिलाफ जंग में संदिग्ध आतंकवादियों से पूछताछ करने और उनकी बातचीत समझने में हुई परेशानी भी है, क्योंकि हमारे पास हिन्दी,उर्दू, पश्तो और दारी समझने वाले सुरक्षाकर्मी नहीं थे। ऐसे में उन्हें भारतीय मूल के लोगों से ही मदद लेनी पड़ी थी।
आज अमरीका में हिन्दी शिक्षण किस स्थिति तक पहुँच गया है?
अमरीका में फिलहाल सरकारी स्तर पर हिन्दी की पढ़ाई केवल विश्वविद्यालय स्तर पर ही हो रही है अर्थात हम शिक्षा के 13वें से 16वें वर्ष में हिन्दी पढ़ाते हैं लेकिन उद्देश्य है कि हाईस्कूल में भी हिन्दी की शिक्षा दी जाए। यूस्टन के बाद निजी स्तर पर तो अनेक स्थानों पर हिन्दी की पढ़ाई हो ही रही है और अब इसकी माँग भी बढ़ रही है। भाषा शिक्षण संबंधी वेबसाइट पर देशवासी अपनी भाषा के शिक्षण की व्यवस्था के लिए वोट डाल सकते हैं। हायर सेकंडरी स्तर पर हिन्दी पढ़ाने के लिए 10 लाख वोट डाले जा चुके हैं। हिन्दी, चीनी को तो अब व्यापार के लिए भी जरूरी माना जा रहा है। शनिवार-रविवार को भी हिन्दी की पढ़ाई होती है।
कुछ निजी संस्थाएँ जैसे यूएसए हिन्दी समिति आदि भी इस दिशा में प्रयासरत हैं?
जी हाँ, यूएसए हिन्दी समिति इस दिशा में काफी कार्य कर रही है। न्यूजर्सी में सबसे ज्यादा हिन्दुस्तानी लोग रहते हैं, अतः वहाँ इसका | अमरीकी सरकार का मानना है कि विदेशी भाषाएँ सीखने और पढ़ाने में कमजोरी का अमरीका की राष्ट्रीय सुरक्षा, कूटनीति, कानून व्यवस्था और सांस्कृतिक समझ पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है |
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फैलाव सबसे ज्यादा है। 1994 में टेक्सास में वेदप्रकाश बटुक (बरकले विश्वविद्यालय) ने भी इसकी शुरुआत की थी। इसके अलावा अब तो हिन्दीके कवि सम्मेलन और कार्यक्रम भी बहुत होते हैं।
यह बात तो हुई भारतीय मूल के लोगों की, किंतु क्या अमरीकन विद्यार्थी भी हिन्दी पढ़ने की ओर अग्रसर हो रहे हैं?
अमरीकी छात्रों की संख्या कम है किंतु हम चाहते हैं कि उनका झुकाव इस ओर बढ़े। भाषा के फ्लैगशिप कार्यक्रम के माध्यम से उनका रुझान इस ओर बढ़ा भी है। इंजीनियरिंग, विज्ञान, चिकित्सा की शिक्षा की पढ़ाई के साथ-साथ प्रतिदिन एक-एक घंटा हिन्दी/उर्दू पढ़ाने की व्यवस्था भी की गई है। यदि छात्र एंथ्रोपोलॉजी पढ़ रहा है तो कुछ समय हिन्दी भी पढ़ेगा। इसमें उनकी मदद के लिए सहायक शिक्षक भी होंगे। शिक्षकों की संस्था भी बढ़ाई जा रही है।
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