मुख्य पृष्ठ > विविध > एनआरआई > एनआरआई गतिविधि
सुझाव/प्रतिक्रियामित्र को भेजियेयह पेज प्रिंट करें
 
स्टारटॉक- आइए हिंदी बोलें  Search similar articles
GNGN
- नरेन चेनी

दिल्ली में जन्म। पेशे से कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर इंजीनियर। अपना स्वतंत्र व्यवसाय भी। पिछले पच्चीस सालों से ह्यूस्टन (टेक्सास) अमेरिका में हैं, किंतु स्वभाषा एवं संस्कृति से प्रेम बना हुआ है। स्टारटॉक कार्यशाला में प्रतिभागी

अमेरिकी स्कूलों और विश्वविद्यालयों में इस वर्ष की गर्मियों की छुट्टियाँ इस अर्थ में विशिष्ट और व्यस्तताभरी हैं कि इस समय छात्रों और भावी हिंदी शिक्षकों के लिए स्टारटॉक के माध्यम से हिंदी सीखने-सिखाने की नि:शुल्क कार्यशाला चल रही है।

अमेरिका के पाँच शहरों सैन डियागो, लॉस एंजिल्स, ब्लूमिंगटन, फोर्ट वर्थ और केंट के स्कूल-यूनिवर्सिटी में छात्रों के लिए हिंदी प्रशिक्षण कार्यक्रम जून से अगस्त के दौरान चलेंगे और भावी शिक्षक तैयार करने का द‍ायित्व फोर्ट वर्थ, वाशिंगटन डीसी, सिएटल, न्यूजर्सी और न्यूयॉर्क के स्कूलों-विश्वविद्यालयों ने उठाया है। अमेरिकन काउंसिल फॉर टीचिंग ऑफ फॉरेन लैंग्वेज (एसीटीएफएल) ने इस कार्यक्रम के लिए अपेक्षित धनराशि की व्यवस्था की है। मार्था अबॉट के कुशल नेतृत्व में इस संस्था से जुड़े विभिन्न अधिकारी और अमेरिकी विश्वविद्यालयों-स्कूलों में हिंदी पढ़ा रहे प्राचार्य-शिक्षक इस कार्यशाला को सफल बनाने के लिए प्रयत्नशील हैं।

GN
यह कार्यशाला पिछले वर्ष शुरू हुई तब इसमें चीनी, फारसी, अरबी और उर्दू को शामिल किया गया था। पहली बार इसमें हिंदी जोड़ी गई है। इस कार्यशाला का पहला उद्देश्य अमेरिका के स्कूलों में हिंदी का पठन-पाठन हाईस्कूल स्तर से शुरू करना है ताकि छात्र विश्वविद्यालय स्तर तक हिंदी पढ़ें और इस भाषा को पूर्णरूपेण आत्मसात करें ताकि भविष्य में वे भारत और अमेरिका के बीच होने वाले व्यापार आदि में सेतु का काम कर सकें।

हिंदी और चीनी- दोनों ही भाषाओं के शिक्षण का उद्देश्य इन देशों में व्यापार का विस्तार है। उल्लेखनीय तथ्य यह है कि चीन की सरकार ने इस सूचना का तत्काल स्वागत किया और अपनी ओर से मात्र शिक्षण संबंधी जानकारियाँ एवं पुस्तकें आदि ही उपलब्ध नहीं कराईं वरन अमेरिका सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई धनराशि में अपनी ओर से भी काफी योगदान दिया। परिणामत: अमेरिका के हाईस्कूलों में चीनी भाषा की पढ़ाई शुरू हो चुकी है।

टेक्सास के फोर्टवर्थ (डलास) शहर में एचईबीआईएसडी स्कूल में हिंदी कार्यशाला 9 से 20 जून तक थी। यह कार्यशाला पूर्णत: नि:शुल्क थी। बच्चों एवं शिक्षकों के लिए समानांतर सत्र चल रहे थे। बच्चों के लिए इन सत्रों का संचालन भवानी पारपिया कर रही थीं। बच्चों के लिए दो सत्र थे, जिनमें क्रमश: सत्रह और अठारह छात्र-छात्राएँ थे। इन कक्षाओं में शिक्षण का भार अंजली देसाई एवं शहनाज के कंधों पर था।

भावी शिक्षकों के सत्र में मात्र सात लोग थे जबकि बीस सीटें थीं। इस संबंध में पूछने पर मालूम हुआ कि वे अधिक प्रचार नहीं करना चाहते थे क्योंकि केवल बीस सीटें थीं किंतु इस बार के प्रयोग से सबक लेकर वे अगली बार इस संदर्भ में जरूर विज्ञापन करना चाहेंगे। प्रतिभागियों ने उन्हें भारतीय समुदाय द्वारा प्रकाशित अखबारों के नाम भी बताए एवं अपने स्तर पर उपलब्ध माध्यमों से इस सूचना को प्रचारित करने का आश्वासन दिया।
1 | 2  >>  
और भी
हिंदी एब्रॉड के समाचार संपादक का सम्मान
'वह रात और अन्य कहानियाँ' का लोकार्पण
कीर्ति चौधरी को याद किया
रत्नम को प्रज्ञा सम्मान
'अभिशप्त' कहानी का मंचन
डॉ. गिरिराजशरण अग्रवाल को साहित्य भूषण सम्मान