ब्रिटेन में रहने वाली कवयित्री कीर्ति चौधरी महादेवी वर्मा के बाद हिन्दी की सबसे महत्वपूर्ण कवयित्री थीं और यशस्वी लेखक सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' ने1959 में उन्हें सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की अनुशंसा पर 'तीसरा सप्तक' में शामिल किया था।
कैंसर से पीड़ित श्रीमती चौधरी का गत दिनों लंदन में निधन हो गया था। वे ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन 'बीबीसी' के मशहूर पत्रकार एवं लेखक स्व. ओंकारनाथ श्रीवास्तव की पत्नी थीं और बच्चन रचनावली के संपादक एवं जाने-माने लेखक अजित कुमार की बहन थीं।
श्रीमती चौधरी की स्मृति में मंगलवार को राजेन्द्र प्रसाद अकादमी में आयोजित शोकसभा में दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कॉलेज के अवकाश प्राप्त प्रो. अजित कुमार ने कहा कि आज से पचास वर्ष पूर्व जब 'अज्ञेय' ने तीसरा सप्तक संपादित किया तो उन्होंने पहले मुझे उसमें शामिल करना चाहा था।
यह बात उन्होंने मेरे एक कविता संग्रह की भूमिका में लिखी थी, पर बाद में उन्होंने 'दिनमान' के जाने-माने पत्रकार एवं कवि सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की अनुशंसा पर कीर्ति चौधरी को उसमें शामिल किया। तब तक कीर्ति अज्ञेय जी से मिली भी नहीं थीं। लेकिन अज्ञेयजी कीर्ति को कविताओं के माध्यम से जानते थे। (वार्ता)
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