- डॉ. सुधा ओम ढींगरा एमए, पीएचडी की डिग्रियाँ हासिल कीं। 1982 में अमेरिका आईं। कुछ समय सेंट लुईस में रहीं। फिलहाल नार्थ कैरोलाइना में रहती हैं। हिन्दी साहित्य से प्यार विरासत में मिला। छोटी उम्र से ही कविता की तरफ रुझान हुआ जो अब तक जारी है। काव्य संग्रह- मेरा दावा है, तलाश पहचान की, परिक्रमा (पंजाबी से हिन्दी में अनुवाद) और माँ ने कहा था कविताओं की सीडी है।
अंतरराष्ट्रीय हिन्दी समिति का चौदहवाँ अधिवेशन क्राउन प्लाजा होटल (वाशिंगटन डीसी) अमेरिका की राजधानी में गत दिनों गौरवपूर्ण और सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। अधिवेशन का मुख्य विषय था- 'वैश्वीकरण के युग में हिन्दी'।
हिन्दी के छात्रों द्वारा प्रस्तुत सुंदर कार्यक्रम से अधिवेशन की शुरुआत हुई। अमेरिका में जन्मे भारतीय मूल और अमेरिकी बच्चों ने हिन्दी में कविता पाठ तथा संभाषण कर समाँ बाँध दिया। शुक्रवार 11 अप्रैल 2008 की रात अमेरिका के कवियों के नाम थी। लगभग तीस कवियों ने तीन घंटों तक कविता पाठ किया। इसका संचालन डॉ. नरेन्द्र टंडन और सुश्री रेणु गुप्ता ने किया।
तीन दिवसीय अधिवेशन में शनिवार 12 अप्रैल, शैक्षिक सत्रों का दिन था। नौ सत्रों का आयोजन हुआ और प्रत्येक सत्र में तीन-तीन बीज वक्ता थे। सत्रों के मुख्य विषय हिन्दी शिक्षण, प्रवासी साहित्य, व्यवसाय जगत में हिन्दी, वास्तुशास्त्र, हिन्दी शब्द रचनावली और रामचरितमानस थे।
संध्या समय भारतीय दूतावास के विशिष्ट अतिथि के संभाषण के साथ पुस्तक विमोचन और पुरस्कार वितरण हुए। अधिवेशन के मंच से संयुक्त राष्ट्र संघ में हिन्दी को आधिकारिक स्थान दिलाने के लिए उद्घोषणा पत्र जारी किया गया।
रात्रि का मुख्य आकर्षण था, भारत से आए कवियों का काव्यपाठ। अंतरराष्ट्रीय हिन्दी समिति की ओर से डॉ. सुधा ओम ढींगरा, डॉ. नंदलाल सिंह और आलोक मिश्रा की टीम ने अमेरिका के 15 शहरों में कवि सम्मेलन आयोजित किए हैं। भारत से आए कवि श्री गजेन्द्र सोलंकी, डॉ. सुनील जोगी और डॉ. सुरेश अवस्थी के कवि सम्मलनों की श्रंखला में अधिवेशन उनका आठवाँ पड़ाव था।
डॉ. सुधा ओम ढींगरा ने कवियों को मंच पर बुलाकर मंच संचालन का भार डॉ. सुरेश अवस्थी को सौंप दिया और तीन घंटे काव्यपाठ चला। हास्य और तालियों की गूँज में लोगों ने तीन बार खड़े होकर कवियों का अभिवादन किया। हास्य, व्यंग्य और देशभक्ति के गीतों से लोग सराबोर हो गए।
इस अधिवेशन में भारत, यूके और अमेरिका के कोने-कोने से बुद्धिजीवी और सुधीजन पधारे थे। रविवार प्रात: बोर्ड की बैठकों के बाद मध्याह्न भोजन वाशिंगटन स्थित भारतीय दूतावास में हुआ। भारतीय दूतावास में अधिकारियों का अतिथि सत्कार प्रशंसनीय था।
अंतरराष्ट्रीय हिन्दी समिति अमेरिका की सबसे पुरानी संस्था है, जो अमेरिका में कवि सम्मेलनों के आयोजन के साथ-साथ 'विश्वा' त्रैमासिक पत्रिका भी प्रकाशित करती है। अधिवेशन के संयोजक डॉ. सतीश मिश्रा और उनकी टीम साधुवाद के पात्र हैं।
- साभार : गर्भनाल
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