सत सोनी किसी की ऐसी-तैसी करनी है? नीचा दिखाना है? तो अपनी जुबान या कलम को गंदा करने की जरूरत नहीं है। बस, एक सर्वे कर-करा लो और जिसे भी धोना चाहो धो डालो। आपके कपड़े पर कोई दाग-धब्बा नहीं लगेगा। आपका मकसद पूरा हो जाएगा और वह भी मुफ्त में! हाल ही के बरसों में हुए कुछ विदेशी सर्वेक्षणों पर नजर डालिए। एक सर्वे में भारत को सबसे प्रदूषित देश करार दिया गया और दूसरे में सबसे गरीब देश। एक और सर्वे में भारत को सबसे भ्रष्ट देशों की सूची में रखा गया। एक ताजा सर्वे में हांगकांग के एक संगठन ने फैसला दिया है कि एशिया में सबसे निकम्मी और लचर नौकरशाही भारत में है। विदेशी-चीजों पर फिदा हम भारतीयों ने इसे सच मान लिया। कई अखबारों ने संपादकीय लिख डाले और अपने देश की सरकार के कामकाज पर सवाल उठाए। कोई इन पत्रकारों से पूछे कि इस सर्वे से पहले आप चुप क्यों थे? इस सर्वे के जवाब में आप भी अपना सर्वे कर सकते हैं जो इस तरह का हो सकता है! 150 देशों में किए गए सर्वे से पता चला है कि हांगकांग के 8.2 प्रतिशत लोग ही सच्चे और खरे हैं। नकली माल बनाने में यह द्वीप सबसे आगे है। मछली से म्यूजिक, मेडिसन और कपड़े-लफड़े, घड़ियाँ-घड़ियाल तक हर मशहूर ब्रांड का नकली माल यहाँ उपलब्ध है और, तो और, यहाँ के 90.6 फीसदी लोग भी नकली हैं। इसी तरह आप अपने सोफे पर चाय पीते हुए अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, पाकिस्तान (या जिससे भी खुन्नस हो) के बारे में सर्वे कर उसे लपेट सकते हैं। जैसे-अमेरिकी प्रशासन ने अपने नागरिकों से कहा है कि वे भारत न जाएँ। एक सर्वे से मालूम हुआ है कि फिल्म 'स्लमडॉग मिलिनियर' देखने के बाद 74.3 प्रतिशत अमेरिकी भारत जाना चाहते हैं। सरकार को डर है कि यदि उसके नागरिकों को झुग्गी-झोपड़ियाँ भा गईं तो हो सकता है कि लोग वापस ही न आएँ।सर्वे करने के लिए आपको कहीं जाने या किसी से उसके विचार जानने की जरूरत नहीं है । क्या आज तक कोई सर्वेकर्ता आपके पास सवाल पूछने आया है? कितने प्रतिशत ने क्या कहा? जो चाहे लिख लीजिए। कोई भी सिरफिरा पुष्टि करने नहीं आएगा। कई टीवी चैनल हर रोज दर्शकों से किसी सवाल के जवाब में एसएमएस मँगाते हैं (और लाखों रुपए बनाते हैं)। एक-दो घंटे बाद रिजल्ट आउट हो जाता है - 58 प्रतिशत लोगों ने हाँ कहा और 42 प्रतिशत ने नहीं में जवाब दिया। क्या कभी किसी ने इनका सच-झूठ जानने की कोशिश की है? अब सवाल यह है कि यदि आपका सर्वे गलत साबित हुआ तो? तो भी आपका कोई नुकसान नहीं होगा, यह हमारी गारंटी है। कानून भी आपका कुछ नहीं कर सकता क्योंकि न तो आपने धोखे से करोड़ों रुपए हजम किए हैं और न ही किसी का खून किया है। आपने तो बस अपनी राय दी है और लोकतंत्र की जीभ में हड्डी तो होती नहीं, जिधर चाहे मोड़ लो। याद रखिए कि जनता की याददाश्त बहुत कमजोर होती है। पाँच साल पहले लोकसभा चुनावों के दौरान किए गए सर्वेक्षणों में से एक भी सही नहीं निकला। इस बार भी सभी सर्वे मुँह के बल गिरे। किसी ने भी इन टीवी चैनलों या सर्वे करने वालों का क्या बिगाड़ लिया? सर्वेकर्ता अपनी जेबें भर कर अगले चुनावों की तैयारी में लग गए।ब्रेकिंग न्यूज : अभी-अभी हमारे एक सर्वे के नतीजे आ गए हैं। चलते-चलते सुनते जाइए। दुनिया के 163 देशों में सर्वेक्षण के धंधे का सर्वे करने के बाद हमें पता चला है कि सभी सर्वे मनगढ़ंत होते हैं और लोगों को गुमराह करने के लिए किए जाते हैं। इसलिए सर्वे पर विश्वास नहीं करना चाहिए। |