मुख पृष्ठ > विविध > साहित्य > व्यंग्य > भारत की राजनीतिक बार्बियाँ
सुझाव/प्रतिक्रियामित्र को भेजिएयह पेज प्रिंट करें
 
भारत की राजनीतिक बार्बियाँ
NDND
दूसरा लफड़ा उनके समर्थकों का है। वे जिस शो-रूम में अपने दल की बार्बी को देखेंगे, वहीं साष्टांग प्रणाम चालू कर देंगे। आदमी माल बेचे कि पार्टी कार्यकर्ताओं को शो-रूम में लोट लगाने से रोके? अपनी-अपनी नेत्री-बार्बी के जन्मदिन पर तो पैर छूने वाले कार्यकर्ताओं की लाइन लग जाएगी। ऊपर से शो-रूम में ही पटाखे, बैंड, मिठाई, हार-फूल, धींगा-मस्ती। बाकी ग्राहक तो भाग ही जाएँगे। तौबा ऐसी बार्बी बनाने से!

तीसरा, तोड़फोड़ का एक और खतरा है। किसी दिन एक्स बार्बी ने आह्वान कर दिया कि वाय बार्बी को उसकी औकात बता दो तो शोकेस से निकालकर दचक-दचककर वाय बार्बी की बुरी गत बनाएँगे एक्स बार्बी के समर्थक। काँच फोड़ देंगे। हमारे फ्रेंचाइजियों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटेंगे। जितना कमाएँगे नहीं, उससे ज्यादा का नुकसान हो जाएगा।

चौथी दिक्कत यह है कि अकेले बार्बी तो बना नहीं सकते। साथ में कम से कम चार गनमैन बनाने पड़ेंगे। सिक्यूरिटी साथ रहने से शान बढ़ती है। आपके देश में नेताओं-नेत्रियों को आतंकवादियों से ज्यादा खतरा विरोधी दल के गुंडों से रहता है। ब्लैक कैट कमांडो से घिरी बार्बीज को देखकर छोटी बच्चियाँ घबरा नहीं जाएँगी?

पाँचवाँ ड्रेस- अप का सवाल है। आपके देश में बार्बीज की ड्रेस महँगी पड़ती है। बार्बी अम्मा बनाना हो तो पोचमपल्ली, कांजीवरम, मैसूर सिल्क पता नहीं कहाँ-कहाँ से ढूँढकर सिल्क साड़ियों का इंतजाम करना पड़े। ऊपर से बुलेटप्रूफ जैकेट। कहते हैं एक छापे में अम्मा के यहाँ साढ़े सात सौ जोड़ सैंडिल्स बरामद हुए थे। कितनी लागत बढ़ जाएगी साहब! और बार्बी एज दलित बहिनजी! असली डायमंड सेट से कम में सजना तो उन्हें क्या मंजूर होगा? तौबा हुजूर, इतनी महँगी बार्बी खरीदेगा कौन? बार्बी हायकमान तो जिस प्रदेश में जाती है, वैसी पोशाक पहन लेती हैं। कैसा पहनावा फाइनल करें, समझ ही नहीं आता।

KaptanND
इन सब दिक्कतों के चलते कुछ भारतीय राजनीतिक बार्बियाँ बना भी ले तो रेपुटेशन खराब होने का डर है। आपके देश की नेत्रियों को जेल जाते रहने का शौक है। कभी भ्रष्टाचार के चलते, कभी प्रतिद्वंद्विता के चलते। कभी लंबा अंतराल आ जाए तो जेल भरो आंदोलन चलाकर वे घूम आती हैं वहाँ। हम नहीं चाहते हमारी बार्बी जेल रिटर्न कहलाए। बंगाल की जिस नेत्री की बार्बी बनाने को आप कह रहे हैं, वे साल में कम से कम दो बार पुलिस से पिटती हैं। कभी उपवास पर बैठती हैं तो कभी मोर्चा खोल देती हैं और वो बिहार वाली बार्बी, बिना पति से पूछे कुछ बोल ही नहीं पाती। बार्बी एज संन्यासिन कभी पदयात्रा पर तो कभी तीरथ मंदिर में। किस नेत्री की बार्बी बनाएँ हम?

हमारी बार्बीज रोल मॉडल्स होती है। वर्तमान में आपके देश की कौन-सी नेत्री इस काबिल है, जरा बताइए तो। माफ कीजिए साहब हम आपकी राजनेत्रियों जैसी बार्बियाँ नहीं बना पाएँगे।
<< 1 | 2 
संबंधित जानकारी खोजें
और भी
मालवा के मूर्खों! एक हो जाओ
चुनावी कुरुक्षेत्र का आँखों देखा हाल
साहित्य में सहकारिता
तुम छुपे हो कहाँ, हे ग्राहक!
बाबाओं की होली बालाओं के संग
निरख सखी फिर फागुन आया