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रेखा चमोली
poem
ND
तुम
जैसे नीले फूलों का एक गुच्छा

जैसे नहरें
दूर तलक जीवन देतीं
पत्तियों संग लुकाछिपी खेलती धूप

बनती-बिगड़ती लहरों संग
गतिमान नदी की खिलखिलाहट

जंगली गुलाबों की खुशबू में रची-बसी हवा
मेहनती खुरदुरे हाथों परोसी नमक-रोटी
एक कुशल रंगरेज

तुम मुझमें
निरंतर लिखी जा रही कविता हो!
सौजन्य से - नया ज्ञानोदय
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