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ओमप्रकाश मिश्र
poem
ND
एक दिन हम भी देखेंगे
फूलों की मुस्कान
धरती-चाँद को बातें करते
नदी की धारा के संग
यात्राएँ करती चंचल इच्छाएँ

छतनार वृक्ष पर सुस्ताती धूप
अल्हड़ बालिका-सी
उछलती-कूदती दुपहरी
आहर किनारे ध्यानमग्न बगुला
पीपल की पत्तियों को सहलाती
मन्द हवाएँ ह्रदय की देहरी पर
तुम्हारा अनिंद्य सौन्दर्य
तिल-तिल क्षर होते जीवन में
तुम्हारी शाश्वत उपस्थिति।
सौजन्य से - नया ज्ञानोदय
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