मील के पत्थर
मंच अपना
कथा-सागर
व्यंग्य
पत्रिकाएँ
आलेख
पुस्तक-समीक्षा
संस्मरण
हरिवंशराय बच्चन
काव्य-संसार
मुलाकात
नीरज
विजयशंकर की कविताएँ
संगत
मुख पृष्ठ
>
विविध
>
साहित्य
>
काव्य-संसार
>
सूर्ख गुलाब के पीले पराग की तरह
सुझाव/प्रतिक्रिया
मित्र को भेजिए
यह पेज प्रिंट करें
सूर्ख गुलाब के पीले पराग की तरह
फाल्गुनी
ND
ND
सूर्ख गुलाब के
पीले पराग की तरह
बिखर गया तुम्हारा प्यार
बेवक्त गाए बेसुरे राग की तरह।
नीले पंछी के
भ
ूरे नीड़ की तरह
ढूँढ रही हूँ कोई साथ
सुनसान
आशियाने की पीर की तरह।
मेहँदिया बालों की
नशीली महक की तरह
शायद कोई आए अब
सुहानी भोर की उजली चमक की तरह।
संबंधित जानकारी खोजें
यह भी खोजें:
सूर्ख गुलाब पराग तुम्हारा प्यार नीले पंछी उजली चमक सुहानी भोर साहित्य
,
कविता
,
काव्यसंसार
,
ग़ज़ल
,
तुम
,
प्रेम
,
याद
,
मंजिल
,
चाँद
,
सूर्य
,
literature
,
darkness
,
sahitya
,
you
,
love
,
memory
,
yade
,
moon
,
ghazal
,
poem
,
poetry
,
kavita
,
kavysansaar
और भी
•
हाँ पापा, मैंने प्यार किया था
•
अग्नि-परीक्षा
•
हमेशा मेरे साथ रहे पापा
•
ख़ता है मोहब्बत तो ख़ता ये क़बूल है
•
दिलकश मेरी रातें होती रहीं
•
एक मासूम होनहार बच्चा