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सुबह आई है, मुलाकात करो
चन्द्रसेन विराट
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सुबह आई है, मुलाकात करो

सुन कि आवाज लगाती है तुझे

नींद से कब से जगाती है तुझे

दे रही द्वार पे दस्तक कब से

जिंदगी कब से बुलाती है तुझे

रातभर स्वप्न सँजोने वाले

नींद की बाँह में खोने वाले

जाग जा धूप निकल आई है

देर हो जाएगी सोने वाले

देख तो ले मिजाज मौसम का

किरणें चखती हैं स्वाद शबनम का

क्यों न सुनता वसंत की आहट

WDWD
नाद यह जिंदगी के सरगम का

सुबह आई है मुलाकात करो

फिर कुशलक्षेम जरा ज्ञात करो

गीत आने दो नया होंठों पर

ये नया दिन है, नई बात करो।
और भी
मिट जाएँगी मेरी स्मृतियाँ
ऐतिहासिक फासले
ब्रह्य के धागे
समय के साथ
केदारनाथ सिंह को देखते हुए
ठंडी अंधेरी रात में