मुख पृष्ठ > विविध > साहित्य > काव्य-संसार > ऐतिहासिक फासले
सुझाव/प्रतिक्रियामित्र को भेजियेयह पेज प्रिंट करें
 
ऐतिहासिक फासले
कुंवर नारायण
ऐतिहासिक फासले
अच्छी तरह याद है

तब तेरह दिन लगे थे ट्रेन से
साइबेरिया के मैदानों को पार करके
मास्को से बाइजिंग तक पहुँचने में।

अब केवल सात दिन लगते हैं
उसी फासले को तय करने में −
हवाई जहाज से सात घंटे भी नहीं लगते।

WDWD
पुराने जमानों में बरसों लगते थे
उसी दूरी को तय करने में।

दूरियों का भूगोल नहीं
उनका समय बदलता है।

कितना ऐतिहासिक लगता है आज
तुमसे उस दिन मिलना।
साभार : तद्भव.कॉम
और भी
ब्रह्य के धागे
समय के साथ
केदारनाथ सिंह को देखते हुए
ठंडी अंधेरी रात में
और सुबह है
वेणुगोपाल की कविता