- रोहित जैन
दिल ये सोचता है किसी पल होगा वो बेवफ़ा भी मेरे लिए बेकल होगा
ग़र मेरी आँखों में बरसातें हैं उसके दिल में भी कोई बादल होगा
हमने सोचा था इश्क़ एक बार है किसे खबर थी ये ग़म मुसलसल होगा
आज तो हमने रोक ली है क़ज़ा अब जो भी होगा वो कल होगा
हवा छू गई जो मेरे चेहरे को सोचता हूँ उसका आँचल होगा
इश्क़ में जलने वाले से कह दो अब वो फ़ना पल-पल होगा
इश्क़ कर लो फ़िर मज़े देखो लब्ज़ हर इक अब ग़ज़ल होगा।
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