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नीरज
18 जनवरी 2008 
दुश्मन को अपना हृदय जरा देकर देखो !
मुझे न करना याद तुम्हारा...
जगत सत्यं ब्रह्म मिथ्‍या
तुम्हारे बिना आरती का दीया यह
तुम ही नहीं मिले जीवन में
एक तेरे बिना प्राण ओ प्राण के !
विश्व चाहे या न चाहे,
प्यार की कहानी चाहिए
बेशरम समय शरमा ही जाएगा
सेज पर साधें बिछा लो,
आदमी को प्यार दो...
प्रेम-पथ हो न सूना
प्रेम का न दान दो
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Jan