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मुलाकात
29 अप्रैल 2007
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मुझे सत्यजीत रे की फिल्में न्यूयॉर्क में देखने को मिलीं
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मनुष्य को मनुष्य बनाए रखना चाहते हैं तो साहित्य को सम्मान देना होगा
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कार्य जिनका सार्वजनिक जीवन पर असर पड़ता हो निजी नहीं
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जीवन के इस पड़ाव पर प्रश्न अभी शेष हैं
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जो घटित होता है मैं वही लिखती हूं
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विज्ञान ने पुराने भय मिटाए पर नए खड़े किए
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साहित्य लेखक की अकेली दुनिया नहीं
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मीडिया ने स्त्री को बिकाऊ बनाया है