यशस्वी पत्रकार प्रभाष जोशी का गुरुवार आधी रात को गाजियाबाद में उनके निवास पर निधन हो गया। वे 72 वर्ष के थे। उनका जन्म 15 जुलाई 1937 को आष्टा में हुआ था। उनके परिवार में पत्नी, दो बेटे, एक बेटी तथा माँ हैं। उनके पार्थिव शरीर को मप्र सरकार के विशेष विमान से इंदौर ले जाया गया।
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अंतिम यात्रा इंदौर से सुबह 8.30 बजे रवाना होगी। अंत्येष्टि शनिवार सुबह 10.30 बजे बड़वाह में खेड़ीघाट पर होगी। श्री जोशी घर पर मैच देख रहे थे, तभी दिल का दौरा पड़ा था। वे हिन्दी के विरले संपादकों में से थे जो क्रिकेट पर नियमित लेख लिखते थे।
गाँधीवादी विचारों में पले-बढ़े तथा भारतीयता में अटूट आस्था रखने वाले श्री जोशी ने राजनीति, क्रिकेट, संगीत और समाज की विभिन्ना समस्याओं पर बेबाक और साहसिक लेखन किया। प्रख्यात समाजवादी नेता सुरेंद्र मोहन, हिन्दी के प्रख्यात आलोचक डॉ. नामवर सिंह. संस्कृति कर्मी एवं ललित कला अकादमी के अध्यक्ष अशोक वाजपेयी, नईदुनिया के प्रधान संपादक आलोक मेहता, पत्रकार विष्णु नागर, राजकिशोर, मंगलेश डबराल, सुधीश पचौरी, नंदन की संपादक क्षमा शर्मा आदि ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।
मप्र के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने कहा है कि श्री जोशी हिन्दी पत्रकारिता के शिखर पुरुष थे। वे उन चुनिंदा पत्रकारों में से थे जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाकर मध्यप्रदेश को गौरवान्वित किया।
नईदुनिया संपादकीय बोर्ड के अध्यक्ष अभय छजलानी ने कहा है कि प्रभाषजी नए शब्दों को गढ़ने वाले ऐसे पत्रकार थे जिन्होंने हिन्दी पत्रकारिता को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया। नईदुनिया के साथ उनका आत्मीय नाता रहा। उन्होंने क्रिकेट की भाषा को हिन्दी में इस तरह प्रयोग किया कि वे एक मापदण्ड बन गए।