शाम साढ़े आठ बजे टीवी का स्विच ऑन कीजिए और आप सोचेंगे कि ज्यादातर चैनलों पर चुनाव संबंधी खबरों की प्रमुखता होगी लेकिन आपको देखने को क्या मिलता है? बिग बॉस के घर की बकवास। यह बड़ी मनोरंजक बात है कि सबसे तेज होने का दावा करने वाला प्रत्येक चैनल चुनाव की खबरों को दिखाने से पहले बिग बॉस के घर की जानकारी दिखाना नहीं भूलता। उस दिन भी जब तीन राज्यों में मतदान हुआ हो। ज्यादा से ज्यादा टीआरपी हथियाने के चक्कर में समाचार चैनल इस हद तक नीचे गिर गए हैं कि अब तो 24 घंटों के समाचार चैनल का समूचा स्वरूप ही बदल गया है।
भारतीय मीडिया के इतिहास में उस समय ऐतिहासिक बदलाव आया था जब चौबीसों घंटों के समाचार चैनल की शुरुआत की गई थी लेकिन आज यह समूचा विचार बहुत अधिक कमजोर और मूर्खतापूर्ण की हद तक हास्यास्पद बन गया है। समाचारों के नाम पर अब आपको समय काटने के लिए उपयोग में लाए जाने वाले कार्यक्रम और बकवास देखने को मिलती है और अगर आप इतने 'भाग्यशाली' नहीं हैं तो आप देख सकते हैं कि कितनी असंवेदनशीलता से वर्दी पहने रिपोर्टर अपराध संबंधी समाचारों को अधिक से अधिक मसालेदार और विवादास्पद बनाने में लगे रहते हैं।
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इतना ही नहीं, कभी-कभी तो एकाएक कोई ऐसा समाचार टीवी पर प्रसारित होने लगता है जिसमें कम अक्ल पत्रकार शोध करने वाले वैज्ञानिकों की तरह बात करते दिखाई पड़ते हैं कि आकाशगंगा के किन ग्रहों में मानव सभ्यता से इतर जीवन हो सकता है। यह जानकारी ज्यादातर मामलों में इंटरनेट-लेखों पर ही आधारित होती है। इन्हीं के आधार पर न्यूज रिपोर्टर्स पृथ्वी और आकाशगंगा के अन्य ग्रहों की उत्पत्ति पर विचार करते हैं और बताते हैं कि किस तरह पृथ्वी पर जीवन एकाएक समाप्त हो सकता है। हालाँकि इस तरह की जानकारी कभी भी पूरी नहीं होती लेकिन अत्यधिक क्षीण संभावना वाले ऐसे विषयों से दर्शकों का ध्यान तो आकर्षित किया ही जा सकता है और टीआरपी बढ़ाने में मदद भी मिलती है।
इस तथ्य का विचारणीय बिंदु यह नहीं है कि दुनिया के दूसरे सबसे अधिक जनसंख्या वाले देश और सातवें सबसे बड़े देश में 24 घंटों तक समाचार दिखाने के लिए समुचित समाचारों की कमी है वरन विचारणीय विषय यह है कि दर्शकों के रूप में हम ऐसे सारे कार्यक्रमों को देखते हैं। हमें ऐसे कार्यक्रमों को देखने में अरुचि नहीं होती वरन हम इसका भरपूर मजा लेते हैं। हम खुश होते हैं जब कोई रिपोर्टर अधिकारियों जैसी वेशभूषा में सामने आता है और मजाकिया लहजे में बताता है कि भारतीय फौज की क्या हालत है।
इसी तरह प्राइम टाइम पर न्यूज टेलिकास्ट में गहन जानकारी दी जाती है कि अभिनेता सैफ अली खान का पेट खराब कैसे हुआ, उन्होंने ऐसा क्या खा लिया कि यह स्थिति आ गई और क्या ऐसी हालत में करीना कपूर भी उनके साथ थीं।
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समाचार चैनल देखते समय हमारी रुचि यह जानकारी पाने में होती है कि डांस रियलिटी शोज के दृश्यों के पीछे की हकीकत क्या है, बिग बॉस के घर में वास्तव में क्या हो रहा है और जंगल में अब कौन सी हस्ती के नहाने की बारी है। जिस किसी ने भी भारत में 24 घंटों के समाचार चैनल के विचार को हकीकत में बदला वह निश्चित रूप से अपना सिर धुन रहा होगा।
पर दोबारा विचार करने पर संभव है कि ऐसा नहीं भी हो क्योंकि भारत में आज टीवी मीडिया की ही तरह संभव है कि वह भी एक मनोरंजन करने वाला रहा हो और किसी भी अर्थ में एक पत्रकार बने रहने में उसकी दिलचस्पी ही नहीं रही हो। ज्यादातर संभावना तो इसी बात की है कि एक-दो वर्षों में दुनिया खत्म हो न हो लेकिन 24 घंटों के न्यूज चैनलों का विचार वास्तव में बदल जाएगा और तब हम देखेंगे कि मनोरंजन के लिए समाचार देने वालों की एक बिलकुल नई पीढ़ी ही पनप चुकी होगी।