जयपुर में आयोजित पाँचवें साहित्य उत्सव में लेखक विक्रम सेठ ने मंच पर शराब पी। इस घटना से साहित्यकारों का एक बड़ा वर्ग नाराज है जबकि कुछ लेखक इसे बेकार का मुद्दा बता रहे हैं। वेबदुनिया ने समारोह में शामिल लेखकों के विचार जाने : वरिष्ठ पत्रकार मुनीश जोशी के अनुसार यह एक अत्यंत शर्मनाक बात है। हमने तो भारतीय मंच की गरिमा का ऐसा हनन कभी नहीं देखा। अब तो सारे महोत्सव का गौरव ही भंग हो गया है। साहित्यकारों को क्या यह सब देखने के लिए बुलाया गया था? हम कुछ साहित्यकारों ने तय किया है कि अगर इसका व्यापक विरोध नहीं होता है तो हम समारोह में भाग नहीं लेंगे। लेखक शशांक दुबे ने विक्रम सेठ के इस व्यवहार की आलोचना करते हुए कहा कि शराब पीना निहायत ही व्यक्तिगत चीज है इसे सार्वजनिक रूप से कतई स्वीकारा नहीं जा सकता। विशेषकर जब बात साहित्य की हो तो जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। क्योंकि साहित्य दुनिया को बेहतर बनाने की कल्पना करता है और उसी के मंच पर इस तरह की हरकत अशोभनीय है। लेखिका अलका सरावगी के अनुसार इसे सामान्य नजरों से देखा जाना चाहिए। उन्हें इसकी तलब हुई होगी तो उन्होनें पी लिया। मैं इसे जरा भी गलत नहीं मानती। विक्रम सेठ के पक्ष में खड़े साहित्यकारों का कहना है कि शराब आज सार्वजनिक रूप से मान्य है अत: इस विषय पर बहस छेड़ना बेमानी है। साहित्यकार शराब पीकर किसी का गला नहीं काटता अत: विक्रम ने ऐसा कोई अपराध नहीं किया है जिस पर हंगामा हो। जबकि अनेक वरिष्ठ साहित्यकार इसे एक गंभीर मुद्दा मान रहे हैं और उन्होनें विक्रम की कड़े शब्दों में निन्दा की है। |