प्रख्यात फिल्मकार और लेखक गुलजार का कहना है कि एक शायर व लेखक के लिए उसकी जुबान ही प्रमुख हथियार होती है। इसलिए हमें सामाजिक सरोकारों पर आधारित ऐसी रचनाओं का निर्माण करना चाहिए जिसे आम आदमी आसानी के साथ समझ सके। गुलाबी नगर जयपुर में बुधवार को पाँचवें साहित्य उत्सव के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए गुलजार ने कहा कि लेखक को वर्तमान को आधार बनाकर अपनी रचना का निर्माण करना चाहिए न कि भूतकाल को। उन्होंने कहा कि मातृभाषाएँ सभी की बनी रहें लेकिन एक ऐसी भाषा की भी जरूरत है जो सभी को आसानी के साथ समझ में आ जाए। साहित्य उत्सव के पहले दिन गुलजार की पुस्तक "किताबें झाँकती हैं बंद आलमारियों के शीशों से" पर चर्चा की गई। गुलजार ने अपनी पुस्तक के विभिन्न अंश पाठकों के सामने रखे। भारतीय संस्कृति संबद्ध परिषद के पवन के. वर्मा ने गुलजार के कृतित्व व व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। इससे पूर्व राजस्थान के राज्यपाल एसके सिंह ने साहित्य उत्सव का उद्घाटन किया। प्रख्यात लेखक यूआर अनंतमूर्ति ने उद्घाटन भाषण में कहा कि भारत का साहित्य अपनी दयनीय स्थिति से उठकर इस मुकाम तक पहुँचा है, हमें आगे भी साहित्य के नए आयाम छूने हैं। साहित्य उत्सव में 23 जनवरी को फिल्म अभिनेता अमिताभ बच्चन भाग लेंगे। अमिताभ मुंबई की लेखिका भावना सौम्या की ओर से लिखी गई पुस्तक बच्चनैलिया पर होने वाली चर्चा में हिस्सेदारी करेंगे। साहित्य उत्सव में भाग लेने के लिए देश-विदेश से कई प्रख्यात साहित्यकार जयपुर आए हैं। पाँच दिन तक चलने वाले इस समारोह में हिन्दी व अँगरेजी साहित्य से जुड़े कई विषयों पर चर्चा होगी। |