समकालीन भारतीय चित्रकला के अनूठे चित्रकार मनजीत बावा नहीं रहे। उनके निधन पर चित्रकार-कवियों ने श्रद्धांजलि दी। बाजार से रिश्ता नहीं था चंद्रकांत देवताले, कवि वे घूमंतू चित्रकार थे और आधुनिक चित्रकला में उनका एक देशी अंदाज था। वे चैनदारी से अपना काम करते थे। उनकी चित्रकारी का किसी भी तरह की होड़ और बाजार से कोई रिश्ता नहीं था। कला उनके लिए जीवन और शुद्ध अभिव्यक्ति का मामला था। यही कारण है कि वे इतना अमूल्य चित्र-संसार रच पाए।
लोककला से प्रभावित कला श्रेणिक जैन, वरिष्ठ चित्रकार मनजीत बावा अपने ढंग के मौलिक चित्रकार थे। उन्होंने मिनिएचर किए और उनकी कला, लोककला से खासी प्रभावित रही है। उनका जाना सचमुच कला जगत की अपूरणीय क्षति है।
देश के बाहर भी सराहना ईश्वरी रावल, वरिष्ठ चित्रकार उनका काम इतना सुंदर होता था कि देश के बाहर भी खूब पसंद किया जाता था। यह बहुत ही सराहनीय है कि उन्होंने पशु-पक्षियों के मूक संसार को अपने कैनवास पर खूबसूरती से जीवंत किया। वे उन चित्रकारों में से थे जो सतत काम कर रहे थे, लेकिन पिछले दो-तीन सालों से उनका शरीर उनका साथ नहीं दे रहा था।
मौलिक शैली ईजाद की संतोष जडिया, मूर्तिकार-चित्रकार पेंटिंग में उनका भारतीयता का अंदाज सबसे जुदा था। उन्होंने किसी की नकल नहीं की और अपनी मौलिक शैली ईजाद की। उन्होंने सुर्रियलिज्म को ठेठ भारतीय रंग देकर पुनर्परिभाषित करने का सुंदर प्रयास किया था।
दूसरे चित्रकारों से अलग अखिलेश,अमूर्त चित्रकार वे समकालीन चित्रकला में नरेटिव फिगरेटिव कला के बरक्स दूसरी दिशा की फिगरेटिव पेंटिंग के कलाकार थे। वे अपने रंगों के लिए प्रख्यात थे। रंगों का उनका बरताब उन्हें दूसरे चित्रकारों से अलग करता है। अब हम उनके रंगों से वंचित रहेंगे। सोचा था ठीक होकर वे फिर से रच सकेंगे, लेकिन अब यह संभव नहीं हो सकेगा।
प्रभावित किया चित्रों ने बीआर बोदडे, चित्रकार उन्होंने खूब ड्राइंग की... और सालों की। मैं उनके चित्रों से काफी प्रभावित रहा। उन्होंने कलाक्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई तथा शेरों को लेकर खूब काम किया।
आनंद देते हैं उनके रंग हरेंद्र शाह, चित्रकार उनके फिगरेटिव काम बहुत यूनिक हैं और उनमें भारतीयता झलकती है। उनके रंग आनंद देते हैं। उनकी चित्रकारी अद्भुत थी। |