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जीवन के रंगमंच से...
राजश्री कासलीवाल
भूल सुधार

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इस प्रकार का वाक्य हम सामाजिक सरोकार में हर जगह आजमाते आए हैं और आजमाते रहेंगे। जब भी किसी शादी की बात हो या किसी ने नाम परिवर्तन किया हो, किसी को सावधान संबंधित सूचना या ‍फिर किसी जाहिर सूचना देने की ही बात क्यों न हो जैसे कि कोई व्यक्ति जाहिर सूचना देकर यह प्रकाशित करवा देता है 'मेरे अमुक-अमुक बेटे को मैंने घर से निकाल दिया है। अत: अब उससे हमारा कोई संबंध नहीं है। आगे से आप उससे जो भी व्यवहार करेंगे उसके लिए हम जवाबदार नहीं हैं' या फिर कहीं इस प्रकार का मैसेज 'हमारी संस्था में काम करने वाला अमुक व्यक्ति लाखों का गबन कर भाग गया है। जो भी कोई उससे संबंध रखेगा या पैसे से संबंधित लेन-देन करेगा उसमें हमारी कोई जवाबदारी नहीं रहेगी।'

इस तरह के रोजमर्रा के कई किस्से हमारे आम जीवन में रोज ही घटित होते हैं। यूँ कहें कि हमें देखने को मिलते हैं। लेकिन इसी प्रकार का किस्सा अगर कभी दो प्यार करने वाले प्रेमी-प्रेमिका के बीच हो जाए तो उस समय यह किस्सा क्या असर डालेगा, यह कहना बहुत मुश्किल है।

अगर एक युवक-युवती के बीच प्रेम हो जाता है। वह भी इतना गहरा कि दोनों एक-दूसरे के ‍‍‍बिना रह नहीं सकते, एक-दूसरे की आवाज, हँसी सुनने तक को वे तरस जाते हैं। एक झलक पाने को भी तरस जाते थे। लेकिन प्यार के कुछ ही दिनों बाद उस युवक को समझ आता है कि उसका यह प्यार करना गलत है। इसलिए वह उससे दूर-दूर रहने लगता है। उससे मिलना-जुलना बंद कर देता है।
  अगर आप भी इस तरह के किसी जुमले से गुजर चुके हैं तो हमें अवश्य बताएँ। यह हमारे लिए एक प्रयास होगा जो लोगों को यह सोचने पर मजबूर करेगा 'प्यार में कभी-कभी ऐसा हो जाता है, जिसे प्यार करो वह भूल सुधार करने को कहता है, 'प्यार में कभी-कभी... !      
और एक दिन वह उस युवती से कहता है कि वह उसे प्यार करना बंद कर दे और उसे भूल जाए, उसकी जिंदगी से निकल जाए। लेकिन प्रश्न यह है कि कल तक जो युवक उस युवती से बहुत प्रेम करता था वह आज इतना कैसे बदल गया। युवती यह समझ नहीं पाती कि जिस व्यक्ति ने उसे इतना प्यार किया... इतना प्यार दिया.... आज वही अचानक एक अनजान आदमी की तरह क्यों पेश आ रहा है। उस युवती को इसका उत्तर न मिल पाने के कारण उसके दिल में तरह-तरह के विचार उत्पन्न होते रहते हैं। ऐसे समय वह जिए या मरे, यह फैसला करना भी‍ उसके लिए बहुत मुश्किल है।


ऐसे मोड़ पर अगर हम भूल सुधार की बात‍ करें। तो क्या आप इस बात को मान सकते हैं कि प्यार में ऐसा कोई मैसेज या फिर अखबार में इस तरह की दो लाइन में स्वीकार कर यह कहा जा सकता है कि 'हम अपने किए हुए प्यार में भूल सुधार करना चाहते हैं। पहले मैं राजेंद्र (उदाहरण के तौर पर) नामक युवक से प्यार करती थी। जिसे भूलवश यह एहसास हो गया है कि उसे उस लड़की से प्यार नहीं करना चाहिए था। हालाँकि हम दोनों ने प्यार किया। पर अब हम अलग-अलग होकर अपनी भूल सुधार रहे हैं। उम्मीद हैं इस लाइन को पढ़ने वालों को कोई परेशानी नहीं होगी।'

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इस तरह का जुमला जब हम अखबार में प्रकाशित करें तो इसका क्या असर होगा। यह कहना बड़ा मुश्किल है। लेकिन यह 'भूल सुधार कार्यक्रम' उस प्रेमिका के लिए बहुत ही घातक साबित होगा। क्योंकि प्यार तो दिल से किया जाता है। और प्यार करने के बाद उसमें भूल सुधार जैसी कोई लाइन ही नहीं होती।

अगर आप भी इस तरह के किसी जुमले से गुजर चुके हैं तो हमें अवश्य बताएँ। यह हमारे लिए एक प्रयास होगा जो लोगों को यह सोचने पर मजबूर करेगा 'प्यार में कभी-कभी ऐसा हो जाता है, जिसे प्यार करो वह भूल सुधार करने को कहता है, 'प्यार में कभी-कभी... !

हमारा यह भूल सुधार कार्यक्रम आपको कैसा लगा? कृपया हमें अवश्य लिख भेजें। हमें आपके जवाब की प्रतीक्षा रहेगी।
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